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जनहित याचिका क्या है : जनहित याचिका कैसे दायर करें : PIL के लाभ व दिशा-निर्देश

जनहित याचिका भारतीय कानून में सार्वजनिक हित की रक्षा के लिये मुकदमे का प्रावधान है। इसमें यह आवश्यक नहीं है कि पीड़ित पक्ष खुद अदालत जाये, 

बल्कि स्वयं न्यायालय या किसी भी नागरिक द्वारा पीड़ितों के पक्ष में जनहित याचिका दायर की जा सकती है यानी कोई भी नागरिक पीड़ितों के पक्ष में न्यायालय जा सकता है।  

जनहित याचिका भारतीय कानून या संविधान में परिभाषित नहीं है, बल्कि यह सुप्रीम कोर्ट द्वारा दी गई व्याख्या से उत्पन्न हुई है, 

इसलिये इसकी उत्पत्ति का श्रेय सुप्रीम कोर्ट को जाता है। इसका अन्तर्राष्ट्रीय समतुल्य भी नहीं है इसे एक विशिष्ट भारतीय अवधारणा के रूप में देखा जाता है। 

जनहित याचिका(PIL) कौन दाखिल कर सकता है : आसान भाषा में वे व्यक्ति/समूह जो कोर्ट तक नहीं पहूंच पाते हैं उन व्यक्ति् या समूहों की सहायता के लिये कुछ लोग उन्हें कोर्ट तक पहूंचाते है।

इसमें यह जरूरी नहीं है कि कोई भी पीड़ित व्यक्ति खुद कोर्ट जाये बल्कि किसी भी नागरिक या खुद न्यायालय (स्वयं संज्ञान लेना- Self Cognizance) द्वारा पीड़ितों के पक्ष में याचिका दायर(Petition Filed) कर सकता है, 

लेकिन यह जनहित याचिका निजी हित(Private Interest) के बजाये सार्वजनिक हित(Public Interest) में दायर(filed) की जाती है।

PIL को केवल सुप्रीम कोर्ट(भारतीय संविधान के अनुच्छेद-32 के तहत) या High Court (भारतीय संविधान के अनुच्छेद-226 के तहत) में ही दायर की जा सकती है। 


जनहित याचिका क्या है  : जनहित याचिका कैसे दायर करें : PIL के लाभ व  दिशा-निर्देश  :  What is PIL in Hindi


जनहित याचिका(PIL) का इतिहास :-

जनहित याचिका(PIL) के Concept की शुरूआत 1960 के दशक में अमेरिका में हुई है। अमेरिका में उन समूह या हित जिनका सामजिक, कानूनी प्रतिनिधित्व नहीं है, उनके लिये शुरूआत किया गया। इसमें शामिल हैं-गरीब, पर्यावरणवादी, उपभोक्ता, प्रजातीय एवं नृजातीय(Ethnic) अल्पसंख्यक तथा अन्य।

भारत में PIL की शुरूआत सुप्रीम कोर्ट की न्यायिक सक्रियता की बजय से 1980 के दशक के मध्य में हुई। इसमें न्यायमूर्ति वी.आर.कृष्णा अय्यर तथा न्यायमूर्ति पी.एन.भगवती की भूमिका महत्वपूर्ण थी, इन्हें PIL के Concept का प्रवर्तक माना जाता है।

जनहित याचिका(PIL) का महत्व :-

  • जैसा कि हम जानते है कि किसी नागरिक व्यक्ति के अधिकारों का उल्लंघन होने पर अनुच्छेद-32 के तहत सुप्रीम कोर्ट और अनुच्छेद-226 के तहत उच्च न्यायालय जा सकता है, 
  • लेकिन उन व्यक्तियों का क्या जो इतने पढ़े-लिखे नहीं होते हैं जो न्यायालय की कार्यवाही को समझ सकें।, जिनको दबाया जाता है, पिछड़े हुए, गरीब, असहाय आदि इसलिये इस समूह/समुदाय को भी न्याय मिल सके। इसी अवधारणा से PIL(Public Interest Litigation) की शुरूआत हुई।
  • जनहित याचिका के अन्तर्गत कोई भी व्यक्ति या सामाजिक संगठन, किसी भी व्यक्ति या व्यक्तियों के समूहों के अधिकार दिलाने के लिये न्यायालय जा सकता है।
  • PIL कानून के शासन के लिये बहुत जरूरी है ताकि न्याय तथा संवैधानिक उद्देश्यों की प्राप्ति की गति को तेज किया जाये।
  • दूसरे शब्दों में कानून के शासन की रक्षा करना, सामाजिक-आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों की न्याय तक प्रभावकारी पहूंच बनाना।
  • मौलिक अधिकारों का सार्थक रूप में प्राप्त करना।
  • न्यायिक समीक्षा के Concept को लागू करने के लिये यह एक महत्वपूर्ण उपकरण है।
  • PIL को सार्वजनिक हित के लिये दायर करना होता है, PIL एक व्यक्ति के अन्य व्यक्ति के खिलाफ दायर नहीं की जाती है।
  • यह एक सहकारी प्रयास(Cooperative effort) है यानी PIL दायर करने वाला यह सुनिश्चित कराता है कि कमजोर वर्गों, संवैधानिक या कानूनी सुविधाएं उपलब्ध कराई जायें।
  • इसमें जो निर्णय दिया जायेगा वह सभी के हितों को ध्यान में रखकर दिया जायेगा ना कि किसी एक व्यक्ति के व्यक्त्वि को।

Public Interest Litigation-PIL in Hindi


Public Interest Litigation(PIL) के विषय क्षेत्र :- सुप्रीम  कोर्ट ने 1998 में PIL के रूप में प्राप्त याचिकाओं पर कार्यवाही के लिये कुछ दिशा-निर्देश बनाये थे एवं 2003 में इन दिशा-निर्देशों में संशोधन किया गया है। इनके अनुसार निम्न Category में आने वाली याचिकाएं सामान्यतः PIL के रूप में मानी जायेंगी :-

  1. बंधुआ श्रमिक(bonded labor)
  2. उपेक्षित बच्चे(Neglected children)
  3. श्रमिकों को न्यूनतम मजदूरी नहीं मिलना।
  4. जेलों में दाखिल उत्पीड़न की शिकायत।
  5. पुलिस उत्पीड़न तथा पुलिस हिरासत में मृत्यु।
  6. महिलाओं पर अत्याचार के खिलाफ, दहेज, बलात्कार, हत्या आदि।
  7. SC/ST एवं आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के पुलिस द्वारा उत्पीड़न।
  8. पर्यावरणीय प्रदूषण संबंधित।
  9. दंगा पीड़ितों की याचिकायें 
  10. पारिवारिक पेंशन(समूह के लिये जैसे आर्मी के पेंशन का मुद्दा)

कौन से मामलों में जनहित याचिका(PIL) दाखिल नहीं होती :- 

  1. मकान मालिक-किरायेदारों के मामले।
  2. सेवा संबंधित(पेंशन, ग्रेच्युटी)
  3. केन्द्र/राज्य सरकार के विभागों तथा स्थानीय निकायों के खिलाफ।
  4. मेडिकल तथा अन्य शैक्षिक संस्थाओं में नामांकन।
  5. जल्दी सुनवाई के लिये उच्च न्यायालय एवं अधीनस्थ न्यायालयों में दाखिल याचिकाएं

PIL दाखिल करने के दिशा-निर्देश-

PIL कानून के शासन के लिये बहुत महत्वपूर्ण है इसलिये इसे Publicity, Politics, निजी हित, पैसों के लिये आदि के लिये दाखिल नहीं करनी चाहिए। 

सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी की है कि PIL कोई गोली नहीं है, ना ही हरेक मर्ज की दवा बल्कि जो न्यायालय तक नहीं पहूंच सकते उन्हें न्यायालय तक पहूंचाना है।

उच्चतम न्यायालय के दिशा-निर्देश- 

  • न्यायालय जो PIL जरूरी व वैध है, उन्हें प्रोत्साहित करें और जो विषय से हटकर है उन्हें हतोत्साहित(Discouraged) करें और रोकें।
  • प्रत्येक न्यायाधीश PIL से निपटने के लिये खुद अपनी प्रक्रिया विकसित करें।
  • न्यायालय को किसी PIL को अपनाने से पहले याचिकाकर्ता की विश्वसनीयता को सत्यापन(Verification) कर लेना चाहिए और याचिका में जो  लिखा है उसके परिशुद्वता(precision) के बारे में आश्वस्त हो लें।
  • न्यायालय को यह भी सुनिश्चित करना चाहिए कि ऐसी याचिकाएं जो व्यवसाय निकायों द्वारा गलत इरादों से दायर की गई हों, उन पर जुर्माना लगाना या ऐसी याचिकाएं जो असंगत कारणों से दायर की गई हों उन्हें ऐसे ही तरीके अपनाकर हतोत्साहित करना चाहिए।

  • भारत में पीआईएल के जनक P.N.भगवती माने जाते हैं, क्योंकि इन्होंने जनहित याचिका हेतु बहुत सारे नियम  बनाए थे जैसे - उन्होंने कहा था पोस्टकार्ड लिखकर भेज दीजिए उसे भी याचिका माना जाएगा  और 
  • लोकहित से प्रेरित कोई भी व्यक्ति या संगठन जनहित याचिका दायर कर सकता है, 
  • कोर्ट को दिया गया पोस्टकार्ड भी याचिका मान कर स्वीकार की जा सकता है, 
  • कोर्ट को यह अधिकार होगा कि वह इस याचिका हेतु सामान्य न्यायालय शुल्क भी माफ कर दे, 
  • यह राज्य के साथ ही निजी संस्थान के विरुद्ध भी लाई जा सकती है।

जनहित याचिका(PIL) दाखिल कैसे होती है :-

जनहित याचिका(PIL) सुप्रीम कोर्ट या हाई कोर्ट में दाखिल होती है।

इसे कोई भी भारतीय नागरिक या संस्थान दायर कर सकता है, लेकिन यह याचिका निजी हित के बजाय सार्वजनिक हित में दायर की जाए, 

यदि कोई मुद्दा सार्वजनिक हित का है तो ऐसे मामलों मैं स्वयं न्यायालय संज्ञान ले सकता है या किसी नागरिक द्वारा जनहित याचिका दायर की जा सकती है।

जनहित याचिका(PIL) से जुड़े मामलों में कोई भी Letter के द्वारा PIL दाखिल कर सकता है इस Letter में बताना होता है कि यह कैसे जनहित याचिका से जुड़ा हुआ है, इसमें जो मुद्दे लिखे हैं उनके पुख्ता सबूत क्या है? 

सबूतों की Copy भी Letter के साथ लगा सकते हैं और यह Letter सुप्रीम कोर्ट व हाई कोर्ट के Chief Justice के नाम से लिखा जा सकता है। 

यह Letter Type या हाथ से लिखा हुआ भी हो सकता है, यह Letter जिस क्षेत्र से जुड़ा होता है इसे उसी को भेजा जाता है, जैसे U.P., राजस्थान आदि।

भारत में जनहित याचिका(PIL) दायर करने की प्रक्रिया क्या है :-  जो भी याचिकाकर्ता है उसे संबंधित मामले की पूरी जानकारी लेनी चाहिए, 

यदि याचिका कई लोगों से संबंधित है तो याचिकाकर्ता को उनसे परामर्श कर लेना चाहिए व  उनकी सहमति लेनी चाहिए और उसे इससे संबंधित सभी दस्तावेज व सबूत इकट्ठे कर लेनी चाहिए|  

याचिका दायर करने वाला व्यक्ति बिना वकील के भी खुद बहस कर सकता है, लेकिन वकील के पास कानून के दाव पेच की जानकारी होती है इसलिए वकील कर लेना बेहतर होगा, ताकि सही सलाह मिल सके।

यदि आप जनहित याचिका उच्च न्यायालय में दायर करते हैं तो उसकी दो कॉपी बनानी होती है जो कि कोर्ट के सामने रखनी होती है और एक कॉपी अग्रिम के रूप में उसको भेजनी होती है जिसके विरूद्ध आप याचिका दायर कर रहे हैं।

यदि आप जनहित याचिका सुप्रीम कोर्ट में दायर करते हो तो आपको इसकी 5 Copy जमा करनी होती है और एक कॉपी उसको भेजनी होती है जिसके विरुद्ध आप याचिका दायर कर रहे हो, लेकिन यह याचिका की कॉपी तभी भेजनी है जब सुप्रीम कोर्ट नोटिस जारी कर दे।

सुप्रीम कोर्ट के जरिये भी PIL दाखिल की जा सकती है। PIL दाखिल करने में कोई ज्यादा फीस नहीं लगती है, लेकिन वकील की फीस देनी होती है। यह  Offline दाखिल करनी होती है।

कोर्ट द्वारा स्वयं संज्ञान लेना(Self Cognizance) - जब कोई जनहित याचिका से संबंधित कोई सूचना/खबर पर Highlight होती है तो कोर्ट खुद संज्ञान ले सकता है। 

जनहित याचिका के लाभ - 

  • इससे जनता में अपने अधिकारों व जागरूकता के बारे में चेतना बढ़ती है।
  • यह मौलिक अधिकारों के क्षेत्र को विस्तारित करता है जिससे व्यक्ति को नये-नये अधिकार मिलते है जैसे कि हमने पिछले कुछ वर्षां में देखा है।
  • ऐसी याचिकाएं कार्यपालिका व विधायिका का उनके कर्तव्यों का पालन करने के लिये बाधित करती है।
  • जनहित याचिका भ्रष्टाचारमुक्त प्रशासन को सुनिश्चित करने के लिये बड़ा कदम है।

जनहित याचिका फीस  :- जनहित याचिका में जो सामान्य फीस होती है उससे कम लगती है यानी जितने व्यक्तियों के विरुद्ध आप याचिका दायर कर रहे हैं, 

प्रत्येक व्यक्ति के लिए 50 रुपए का शुल्क देना होता है और फिर कितना खर्च आएगा यह वकील पर निर्भर करता है यदि आप स्वयं पैरवी कर रहे हैं तो खर्चा बहुत कम आएगा।

जनहित याचिका(पीआईएल) की सुनवाई में कितना समय लगता है :-  यह मामले पर निर्भर करता है जैसे - यदि कोई मामला व्यक्तियों के जीवन से जुड़ा हुआ है, दैहिक स्वतंत्रता से जुड़ा हुआ है, मानव अधिकारों से जुड़ा हुआ है, मूल अधिकारों के प्रशासन से जुड़ा हुआ है तो ऐसे मामलों में अदालत बहुत कम समय में सुनवाई करती हैं और जल्द से जल्द निर्णय देती हैं|  

वैसे तो अदालतों में बहुत ज्यादा मामले Pending है जिसके कारण PIL बढ़ती जा रही है इसलिए PIL की सुनवाई में बहुत समय लग जाता है।

जनहित याचिका के बारे में जानकारी(FAQs) :

Q. जनहित याचिका के जनक कौन है?

A. भारत में पीआईएल के जनक पी.एन. भगवती माने जाते हैं क्योंकि इन्होंने जनहित याचिका हेतु बहुत सारे नियम बनाए हैं बनाए थे जैसे उन्होंने कहा था पोस्टकार्ड लिखकर भेज दीजिए उसे भी याचिका माना जाएगा।

Q. जनहित याचिका कहाँ से प्रारंभ हुई ?

A. जनहित याचिका(PIL) के Concept की शुरूआत 1960 के दशक में अमेरिका में हुई है।

Q. जनहित याचिका कहाँ दायर की जा सकती है?

A. जनहित याचिका(PIL) केवल सुप्रीम कोर्ट(भारतीय संविधान के अनुच्छेद-32 के तहत) या High Court (भारतीय संविधान के अनुच्छेद-226 के तहत) में ही दायर की जा सकती है। 

Q. PIL Full form?

A.  Public Interest Litigation.



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