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Cloud Computing in hindi, क्लाउड कंप्यूटिंग के प्रकार, इसके उपयोग और फायदे व यह कैसे काम करता है

हो सकता है आप क्लाउड कंप्यूटिंग का Use करते हो, लेकिन आप इसके बारे में नहीं जानते हैं या आपने इसका नाम सुना हो, 

लेकिन आपको इसके बारे में ज्यादा जानकारी ना हो, तो आज हम क्लाउड कंप्यूटिंग के बारे में बताएंगे कि क्लाउड कंप्यूटिंग क्या है?, यह कितने प्रकार की है?, इसके फायदे - नुकसान, यह कैसे काम करता है ? आदि।

जब आप इंटरनेट के द्वारा ईमेल भेजते हैं, Documents को edit करते हैं, टी.वी. देखते हैं, गेम खेलते हैं, File को शेयर करते हैं आदि यह सब क्लाउड कंप्यूटिंग द्वारा ही किया जाता है| 

आज छोटी कंपनी से लेकर बड़े कंपनियां क्लाउड कंप्यूटिंग का प्रयोग कर रही है।


क्लाउड कंप्यूटिंग क्या है( What is 
Cloud Computing in hindi ) :-  यदि आप इंटरनेट पर कोई भी फाइल अपलोड करते हैं और इस फाइल का कहीं और इस्तेमाल करते हैं, 

जैसे - यदि आपने अपने लैपटॉप पर कोई फाइल Upload की और आप कहीं बाहर जा रहे हैं और आप इस फाइल को अपने मोबाइल से एक्सेस कर पा रहे हैं, तो यह एक क्लाउड कंप्यूटिंग का उदाहरण है।

जब आप अपने कंप्यूटर या लैपटॉप में डेटा Save करते हैं, कोई फाइल बनाते हैं,(जैसे - कोई वीडियो फाइल, M.S. Word File) और जब इसे अपने कंप्यूटर में स्टोर करते हैं, तो यह आपके Hard disk में Store होती है और आपको इसे कहीं ले जाना है, 

तो आप Pen drive बगैरा में Copy करके ले जाते हैं, फिर उसको use करते हैं, लेकिन इन सब में आपको Hardware की जरूरत होती है, 

लेकिन क्लाउड कंप्यूटिंग(cloud Computing) से आपको Hardware जैसी - कोई भी चीज की  जरूरत नहीं होती है, 

बस आपको इंटरनेट की जरूरत होती है और आप अपने data को Google Drive जैसी सर्विस में स्टोर कर सकते हैं जैसे- अपनी वीडियो फाइल, ऑडियो फाइल, M.S. Word की फाइल को स्टोर करके कहीं भी एक्सेस कर सकते हो।

जब आप किसी फाइल को अपने कंप्यूटर या फोन मैं किसी Folder में Save करते हैं, जो कि अक्सर Offline होता है और जब आप अपना कंप्यूटर या फोन Change कर लेते हैं, तो इस फाइल को नहीं ढूंढ पाते हैं, 

इसी समस्या से निपटने के लिए क्लाउड कंप्यूटिंग(Cloud Computing) सर्विस देती है जो कि data को स्टोर करने के लिए इस्तेमाल की जाती है।

Cloud Computing, Computing सर्विस की Delivery होती है, जिसमें Server, Networking, Storage, Database, Software, Intelligence शामिल है, 

ये सब सर्विस इंटरनेट के द्वारा ही उपलब्ध हो पाती है, तो यहां Cloud का मतलब इंटरनेट से है और कंप्यूटिंग को ऐसे स्टोरेज के रूप में समझा जा सकता है, जिसे हम कभी भी, कहीं भी इस्तेमाल कर सकते हैं,   

जैसे - इसमें आप अपनी फाइल को ऑनलाइन Edit कर सकते हैं, Share कर सकते हैं, Google Service जैसी सर्विस द्वारा।


Cloud Computing क्या है, क्लाउड कंप्यूटिंग के प्रकार,  इसके उपयोग और फायदे  व यह कैसे काम करता है :  Cloud Computing in hindi


क्लाउड कंप्यूटिंग कैसे काम करता है :- Google, माइक्रोसॉफ्ट जैसी बड़ी कंपनियों ने अपने यहां बड़े-बड़े Server लगाए हैं और इन Server मैं बहुत सारी Hard disk होती है| 

एक Server इतना बड़ा भी हो सकता है कि उसमें इतना data Store किया जा सकता है, जिसकी आप कल्पना भी नहीं कर सकते और इस Server के data को आप नेटवर्किंग के माध्यम से कहीं भी यूज कर सकते हैं, 

जैसे - गूगल ड्राइव, इसमें आप अपने कंप्यूटर से data स्टोर करते हैं और मोबाइल पर इस्तेमाल कर लेते हैं यानी आप इस data को इंटरनेट के माध्यम से कहीं भी इस्तेमाल कर सकते हैं।

क्लाउड कंप्यूटिंग में कई सारे server होते हैं, क्लाउड कंप्यूटिंग मुख्यतः 2 लेयर तकनीक पर काम करता है जहां Server मैनेज करने के लिए एक अलग लेयर होती हैं, जिसे back end कहते हैं और दूसरी लेयर जिसे क्लाइंट(Client) इस्तेमाल करते हैं इसे Front end कहते हैं|   

इसी तरह back end और front end दोनों को मिलकर एक पूरा क्लाउड कंप्यूटिंग के लिए सर्वर सेटअप होता है।

क्लाउड कंप्यूटिंग(Cloud Computing) के प्रकार :(- 

क्लाउड कंप्यूटिंग 4 प्रकार के होते हैं :- 

1. Public Cloud Computing,  
2. Private Cloud Computing,  
3. Community Cloud Computing,  
4. Hybrid Cloud Computing.


Public Cloud :- 
यानी कोई फाइल इंटरनेट पर उपलब्ध है और इस फाइल को कोई भी डाउनलोड कर सकता है और कोई भी व्यक्ति data को स्टोर और एक्सेस कर सकता है| 

यह इंटरनेट के यूजर्स को क्लाउड सेवाएं प्रदान करते हैं, इनको Third पार्टी जैसे - गूगल, माइक्रोसॉफ्ट आदि द्वारा मैनेज किया जाता है|

पब्लिक क्लाउड में pay-per-use के हिसाब से पैसे देने होते हैं| 

यह एक समय में एक से ज्यादा यूजर को सेवा प्रदान करता है|  

पब्लिक क्लाउड के उदाहरण है - माइक्रोसॉफ्ट, IBM, गूगल एप इंजन आदि|  

इस क्लाउड में कंप्यूटिंग रिसोर्सेस को CSP(Cloud Service Provider) द्वारा मैनेज किया जाता है |

Public Cloud की सर्विस कई बार फ्री रहती है या इनके लिए बहुत कम चार्ज किया जाता है।

Private Cloud :-  जब आप Google drive जैसी सर्विस पर अपनी फाइल स्टोर करते हो और इस फाइल को आपके अलावा कोई दूसरा इस्तेमाल नहीं करता है, 

इसके लिए आपको User ID और Password की जरूरत होती है, ताकि आपका सारा data ई मेल ID और पासवर्ड में सुरक्षित रहे| जिससे इस data को आपके अलावा कोई दूसरा use नहीं कर सकता है| 

Private Cloud, Private Infrastructure पर काम करता है, जैसे - इसका इस्तेमाल प्राइवेट कंपनी द्वारा किया जाता है तथा इसे Internal या Corporate Cloud के नाम से भी जाना जाता है| 

प्राइवेट Cloud की सुरक्षा बहुत अधिक होती है, इसमें Firewall का इस्तेमाल data को सुरक्षित रखने के लिए किया जाता है |

इस Cloud को स्थान और मैनेजमेंट के आधार पर दो भागों में बांटा गया है- 

 1. On - premise Private Cloud,

  2. Out Sourced Private Cloud.

Community Cloud :-  इसमें कुछ लोगों को ही File एक्सेस करने की अनुमति दी जाती है, जैसे - एक ग्रुप है उसने एक वेबसाइट बनाई, तो केवल वह ग्रुप ही इस वेबसाइट का इस्तेमाल कर पाता है, 

दूसरा Example सरकारी दफ्तर का data जो क्लाउड कंप्यूटिंग में है,तो केवल उस दफ्तर के कर्मचारी ही उस data का इस्तेमाल कर सकते हैं।

यह एक प्रकार का Distributed System है, क्योंकि इस क्लाउड को एक या एक से अधिक संगठन या third Party के द्वारा मैनेज किया जाता है और इस संगठन द्वारा ही इस उपलब्ध data का इस्तेमाल किया जाता है, 

यह दूसरे क्लाउड की तुलना में काफी सस्ते और सुरक्षित होते हैं उदाहरण है -  हेल्थ केयर।

Hybrid Cloud :- जहां पब्लिक ओर प्राइवेट क्लाउड इस्तेमाल किए जाते हैं तो वह हाइब्रिड क्लाउड में बदल जाता है, जैसे - जब Facebook पर आप अपनी कई सारी फाइल अपलोड करते हैं तथा इसके इस्तेमाल के लिए आपको User ID और Password की जरूरत होती है, 

लेकिन वहां पर कुछ ऐसी चीजें दी गई हैं जिन्हें आप फ्री में डाउनलोड कर सकते हैं या आपके अलावा कोई और फ्री में डाउनलोड कर सकता है, जिससे यह Public Cloud बन जाता है और जब प्राइवेट और पब्लिक Cloud आपस में मिल जाते हैं तो Hybrid Cloud बन जाता है |

Hybrid Cloud को heterogeneous Cloud भी कहा जाता है तथा यह Public Cloud और Private Cloud दोनों की सेवाएं प्रदान करता है| 

यह Cloud उन Organization या कंपनी के लिए अच्छे होते हैं जिन्हें अधिक सुरक्षा की आवश्यकता होती है|  

हम कह सकते हैं कि इसकी सुरक्षा Private Cloud से कम और Public Cloud se ज्यादा होती है Hybrid Cloud के उदाहरण है - Google Drive, Gmail, M.S. Word, Google Apps आदि।

Cloud Computing के उदाहरण :-  वैसे तो क्लाउड कंप्यूटिंग के बहुत से उदाहरण है, लेकिन प्रमुख उदाहरण निम्न है :-

Facebook :- आज जिस तरह से फेसबुक के यूजर्स की संख्या है, इसमें करोड़ों - अरबों लोगों की प्रोफाइल बनी हुई है और बहुत से data मौजूद है, तो ऐसे में इतने सारे डेटा को रखने के लिए फेसबुक Cloud Computing का इस्तेमाल करता है।

You Tube :- बहुत तेजी के साथ बढ़ता हुआ यूट्यूब पर आज रोजाना लाखों वीडियो अपलोड होते हैं, तो यूट्यूब इतने सारे वीडियो को अपलोड करने के लिए क्लाउड कंप्यूटिंग का यूज करता है।

ई मेल(Email) :- ई मेल सर्विस देने वाली सभी कंपनियां (जैसे - Gmail, Yahoo आदि ) क्लाउड कंप्यूटिंग का ही Use करते हैं |

Google Drive :- क्लाउड कंप्यूटिंग में Google drive का महत्व बहुत ज्यादा बढ़ जाता है, जिसे आप किसी फाइल को अपने कंप्यूटर से गूगल ड्राइव में Save करते हो तो इस File का इस्तेमाल आप कहीं भी कर सकते हो| 

इसके अलावा क्लाउड कंप्यूटिंग के बहुत से उदाहरण है, जैसे - 

  • Drop box, 
  • Picasa, 
  • Flicker, 
  • Hubspot, 
  • Salesforce, 
  • Google Docs, 
  •  Aws,
  •  Slide rocket,
  • IBM cloud आदि।

क्लाउड कंप्यूटिंग के फायदे व लाभ(Advantages of cloud computing) :

  • Cloud Computing को use करना आसान है - यानी आप अपने data और फाइल को किसी से भी और कहीं से(मोबाइल, लैपटॉप आदि) use कर सकते हैं।
  • लागत कम होना - इसकी लागत काफी कम होती है, क्योंकि इसका use करने वाली कंपनी को हार्डवेयर, सॉफ्टवेयर खरीदने व सेटअप करने पर खर्चा करने की जरूरत नहीं होती, 
  • बल्कि कंपनी ऑनलाइन इंटरनेट पर Space लेकर क्लाउड कंप्यूटिंग की सर्विस का इस्तेमाल करके अपना बिजनेस बहुत ही कम खर्चे पर चला सकती है।
  • User क्लाउड कंप्यूटिंग की Service का जितना इस्तेमाल करना है, उसे उतना ही pay करना पड़ता है जिससे पता लगता है कि यह Service Flexible, कम खर्चीली होती है।
  • क्लाउड कंप्यूटिंग की Speed Fast होती है, जिसमें कुछ Clicks करके ही बिजनेस को आगे बढ़ाया जा सकता है, क्योंकि यह इंटरनेट पर निर्भर करता है| 
  • यदि आपके इंटरनेट की Speed तेज होगी तो बिजनेस भी तेजी से चलेगा|  
  • Cloud Computing की Service ज्यादा सुरक्षित और Upgrade होती है जिससे इनकी Performance अच्छी होती है।
  • साथ ही यह data बैकअप और disature Recovery को आसान बनाती है, इसलिए इसे एक विश्वसनीय सर्विस कहा जाता है| 
  • सिक्योरिटी के लिए बहुत से Cloud Providers यूजर्स को Policies और टेक्नोलॉजी का सेटअप Offer करते हैं जिससे यूजर्स के लिए data, इन्फ्राट्रक्चर आदि को Threat से बचाने के लिए आसान हो जाता है
  • Cloud Computing में जिन सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर का इस्तेमाल किया जाता है, उन्हें Maintain करने में कम खर्च आता है| 
  • क्लाउड कंप्यूटिंग में Documents, चित्र, ऑडियो, वीडियो जैसे - data को Store करने के लिए ज्यादा Memory Space मौजूद होता है| 

  • यह यूजर्स के data को सुरक्षित रखने के लिए Firewall का यूज करता है जिससे यूजर्स का डाटा सुरक्षित रहता है।
  • हम रहते है भारत में लेकिन हम किसी काम से चले गये अमेरिका और हमें अपने डेटा की जरूरत पड़ती है तो हम क्लाउड कंप्यूटिंग की मदद से उस को एक्सेस कर सकते हैं।
  • जब किसी फिजिकल सर्वर से तुलना करें तो हम पायेंगे कि इसकी कीमत बहुत कम होती है, तथा बहुत से ऐसे सर्विस प्रोवाइडर हैं जो यह सर्विस फ्री में भी उपलब्ध कराते है, जैसे गूगल ड्राइव का उदाहरण ले तो यह हमे 15 जीबी तक डेटा स्टोर करने के लिये फ्री में सर्विस देता है।
  • यह इंटरनेट के माध्यम से चलाता है जिसकी वजह से इसकी स्पीड काफी तेज होती है, वस आपको लॉग इन करना है और यह शुरू हो जायेगा।

  • इसमें आपको किसी भी तरह का फिजिकल खर्च करने की जरूरत नहीं होती है, जैसे किसी ट्रेनर को हायर करना, कर्मचारियों को रखना, हार्डवेयर का खरीदना, क्योंकि यह सब सर्विस प्रोवाइडर ही उपलब्ध कराता है।

  • इसमें ओटोमेटिक सोफ्टवेयर को अपग्रेड कर लेता है आपको कोई जरूरत नहीं अतिरिक्त प्रयास करने की ।
  • बिना किसी एप्लीकेशन को इंस्टॉल किये आप इसे एक्सेस कर सकते हो।
  • जब आप क्लाउड कंप्यूटिंग पर डेटा को स्टोर करते हो तो आप इसका कभी भी बेकअप ले सकते हो, इसे स्टोर कर सकते हो।

    Cloud Computing के नुकसान(disadvantages of cloud computing)  :-  

    Cloud Computing में बिना इंटरनेट के हम data और File को एक्सेस नहीं कर सकते|

    Organization या कंपनी क्लाउड कंप्यूटिंग की सेवाओं को एक Customer से दूसरे Customer के पास Transfer करते हैं, तो इन्हें कई समस्याओं का सामना करना पड़ता है, 

    जैसे कि हम देखते हैं क्लाउड कंप्यूटिंग को सर्विस प्रोवाइडर के द्वारा Manage और Control किया जाता है, जिससे यूजर्स बहुत कम, इसकी सेवाओं को कंट्रोल और एक्सेस कर पाते हैं| 

    वैसे तो क्लाउड कंप्यूटिंग सुरक्षा के मामले में अच्छा होता है, लेकिन जब इसके data को ट्रांसफर किया जाता है तो हैकर्स द्वारा data की चोरी का खतरा रहता है।

    यदि कहीं आप ऐसी जगह पर चले गये हैं जहां पर इंटरनेट नहीं तो आप इसका प्रयोग नहीं कर पायेंगे, क्येंकि यह बिना इंटरनेट की मदद से नहीं चल सकता ।

    यदि इसमें सिक्युरिटी की समस्या आती है, हमारा सारा डेटा सर्विस प्रोवाइडर के पास होता है, क्योंकि प्रोवाइडर हमारे डेटा का मिसयूज कर सकता है।

    यह थर्ड पार्टी के द्वारा की मैनेंज व कंट्रोल होता है, हम इसको मैनेज नहीं कर सकते।

    क्लाउड कंप्यूटिंग के उपयोग :  

    Cloud Computing का इस्तेमाल कई जगह किया जाता है, जो निम्न है :-

    Backup और Recover :- इसका इस्तेमाल Backup लेने के लिए करते हैं व जब आपका data खो जाता है, इसको दोबारा प्राप्त करने के लिए क्लाउड कंप्यूटिंग में बहुत से Tools होते हैं, जो खोए हुए data को Retrieve करते हैं| 

    वैसे किसी खोए हुए डाटा को दोबारा प्राप्त करना बहुत मुश्किल होता है, लेकिन क्लाउड कंप्यूटिंग में data को Recover करना बहुत आसान होता है।

    Big Data Analysis :-  वैसे तो क्लाउड कंप्यूटिंग का use बड़ी कंपनियों द्वारा जो डाटा को स्टोर करते हैं, उसे Analyze करने के लिए किया जाता है| 

    जब data को बड़ी मात्रा में Analyze किया जाता है तो वह बड़ा मुश्किल काम होता है, लेकिन क्लाउड कंप्यूटिंग ने इस काम को आसान बना दिया।

    Online Data Storage :-  किसी File, Image, वीडियो, ऑडियो, को Store, क्लाउड कंप्यूटिंग का यूज कर Cloud Storage पर किया जाता है| 

    Online Data Storage Files और data को Storage प्रदान करता है, साथ ही इसका उपयोग ऑर्गेनाइजेशन या कंपनी द्वारा बड़ी मात्रा में data को स्टोर और एक्सेस करने के लिए किया जाता है।

    Antivirus :- वैसे क्लाउड कंप्यूटिंग एक प्रकार का एंटीवायरस होता है, जो System में देखभाल के साथ, उन्हें सुरक्षित रखता है| 

    E-Commerce :- जब आप किसी E-Commerce वेबसाइट(जैसे- अमेजॉन, फ्लिपकार्ट आदि ) पर जाते हो और देखते हो कि वहां बहुत सारे प्रोडक्ट्स दिखेंगे, इन सब प्रोडक्ट्स के data को ऑनलाइन Store करने के लिए क्लाउड कंप्यूटिंग का प्रयोग किया जाता है|  

    जिससे व्यापारी और Customer दोनों direct एक दूसरे से जुड़ पाते हैं| 

    Testing :-  क्लाउड कंप्यूटिंग का यूज किसी एप्लीकेशन को टेस्ट करने के लिए भी किया जाता है, इसमें टेस्ट करना बहुत आसान है, क्लाउड कंप्यूटिंग में बहुत सारे ऐसे टूल्स होते हैं, जिनके द्वारा किसी भी एप्लीकेशन को आसानी से टेस्ट किया जा सकता है |

    सरकारी क्षेत्र में :- आज सरकारी काम ज्यादातर कंप्यूटर पर ही होते हैं व सरकार का कोई ऐसा विभाग या संस्था नहीं है, जहां कंप्यूटर का इस्तेमाल ना किया जाता है|  

    सरकार द्वारा लोगो का data क्लाउड कंप्यूटिंग में save किया जाता है, ताकि उसे आसानी से किया जा सके| 

    निजी क्षेत्र में :- जितने भी संगठन व कंपनियां है उनमें अधिकतर काम कंप्यूटर द्वारा ही किया जाता है और यह संगठनऔर कंपनियां data, Files को Store, एक्सेस करने के लिए क्लाउड कंप्यूटिंग का इस्तेमाल करती है।

    मेडिकल के क्षेत्र :- इस क्षेत्र में क्लाउड कंप्यूटिंग का इस्तेमाल मरीजों के data को स्टोर करने, डॉक्टर द्वारा इमरजेंसी कॉल, एंबुलेंस की जानकारी, स्टाफ की जानकारी, मरीजों के बीच सूचनाओं का डिस्ट्रीब्यूशन आदि को एक्सेस करने के लिए किया जाता है| 

    इसके अलावा क्लाउड कंप्यूटिंग का इस्तेमाल बहुत सी जगह पर किया जाता है, जैसे - ऑनलाइन गेम, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग, मनोरंजन के क्षेत्र में, Streaming Services में आदि ।

    Cloud Computing का इतिहास :- वैसे क्लाउड कंप्यूटिंग की शुरुआत 1960 के दशक मैं मानी जाती है, लेकिन जब 1990 के आसपास Sales force कंपनी ने अपनी वेबसाइट के यूजर्स को सेवाएं देना शुरू किया, 

    उसके बाद से इसकी वास्तविक शुरुआत को माना जाता है, क्योंकि इसके बाद लोगों ने क्लाउड कंप्यूटिंग के महत्व को माना और उसे समझना शुरू किया |

    जिससे अनुमान लगाया गया कि यह आने वाले समय में बहुत महत्वपूर्ण हो सकता है, फिर कई वर्षों बाद इस क्षेत्र में तेजी तब आई, जब अमेज़न, गूगल, माइक्रोसॉफ्ट जैसी कंपनियों ने क्लाउड कंप्यूटिंग की सर्विस देना देनी शुरू की।


    Cloud Computing क्या है, क्लाउड कंप्यूटिंग के प्रकार,  इसके उपयोग और फायदे  व यह कैसे काम करता है :  Cloud Computing in hindi


    Cloud Computing Services : 

    इसमें बुनियादी तीन Services होती हैं जो निम्न है:- 

    1. IaaS, 

    2. PaaS, 

    3. SaaS

    IaaS :-  इसकी full form - Infrastructure as a service है, इसमें यूज़र्स को Cloud वातावरण में Hardware, डेटाबेस,Networking व Storage प्रदान की जाती है | 

    PaaS :-  इसकी full form - Platform as a service है, इसमें ग्राहक द्वारा सॉफ्टवेयर एप्लीकेशन बनाई जा सकती है, उसे Manage और deliver की जा सकती है।

    SaaS :- इसकी full form - Software as a service है यह एक Distribution मॉडल है जिसका use इंटरनेट पर एप्लीकेशन और सेवाओं को distribute करने के लिए किया जाता है।

    IaaS की तरह ही एक सर्विस और है जिसका नाम FaaS  है इसकी full form :- Functions as a service है|

    यह एक ऐसी सर्विस है, जिसमें डेवलपर्स को इंटरनेट पर एप्लीकेशन बनाने के लिए वातावरण या प्लेटफार्म प्रदान करती है।

    Cloud Computing में करियर :- यदि आप इसमें Skill और सर्टिफिकेट हासिल कर लेते हैं, तो फ्यूचर में जिस तरह से टेक्नोलॉजी का विस्तार होगा हो रहा है, 

    उसी तरह इसमें बहुत ज्यादा Opportunities मिलने की संभावना है, क्योंकि आने वाले समय में क्लाउड कंप्यूटिंग की Demand ना केवल इंडिया में, बल्कि पूरे विश्व में इसकी Demand होगी,

    क्योंकि आज छोटा बिजनेस हो या बड़ा बिजनेस हर कोई यही चाह रहा है कि अपने बिजनेस को ऑनलाइन लाया जाए, 

    इसलिए आपके लिए बहुत सारे अवसर मिल सकते हैं इसमें करियर बनाने के लिए आप क्लास 12th के बाद क्लाउड कंप्यूटिंग के क्षेत्र में आ सकते हैं और सर्टिफिकेट प्राप्त कर सकते हो|

    Cloud Computing और Cloud Storage में अन्तर :-

    Cloud Computing : क्लाउड कम्प्यूटिंग इंटरनेट पर दी जाने वाली Computing सर्विस की Delivery है जिसमें Servers, Database, Networking, Software, Analytics, Intelligence शामिल है।

    क्लाउड कम्प्यूटिंग इंटरनेट पर IT Resource की Demand Delivery है, जिसे आप अपनी जरूरत के हिसाब से ले सकते हैं।

    इसमें फिजिकल डेटा सेन्टर और Server को खरीदने की जरूरत नहीं होती है, बल्कि डेटा को कम्प्यूटिंग पॉवर, स्टोरेज, डेटाबेस जैसी सर्विस पर एक्सेस किया जा सकता है जिसे सर्विस प्रोवाइडर से लिया जा सकता है जैसे-  AWS-amazon.com Web Services ।

    क्लाउड कम्प्यूटिंग अपनी पकड़ बनाता जा रहा है जो बहुत ज्यादा Offer उपलब्ध कराती है जैसे - Efficiency, Transparency, Collaboration, Innovation. 

    बहुत से संगठन या कम्पनियां Data backup, Disaster Discovery, Email, Virtual Desktops, Big Data, Analytics आदि पर क्लाउड कम्प्यूटिंग को यूज करती है।

    Cloud Storage क्या हैः-

    Cloud Storage इंटरनेट पर डेटा को स्टोर करता है जैसे- Google Drive, Dropbox, iCloud.

    Cloud Storage का मतलब है डेटा को सर्वर पर स्टोर करना, ताकि उसे इंटरनेट पर Accessible बनाया जा सके।

    इसमें  आप अपना सारा डेटा किसी सर्वर पर save रख सकते हैं,  जब एक बार आपका डेटा Cloud Storage में सेव हो जाता है तो आप जब चाहे इसका इस्तेमाल कहीं भी, कभी भी, अनेकों Devices पर कर सकते हो।

    Cloud Storage के उदाहरण-  Google Drive, iCloud, DropBox, Data Servers, One Drive, Personal Storage, Website Hosting, Virtual Desktop Hosting, Application Hosting.

    बिजनेस में इसका इस्तेमाल Documents वगैरा में स्टोर करते है और दूसरों के साथ शेयर भी करने में भी इसका यूज करते हैं।

    Personal यूज के लिये आप इसमें Email, Media Files को स्टोर करने में करते है।

    Cloud Storage की खास बात यह है कि यह डेटा स्टोर करने के लिये Unlimited  Space देता है इसकी लागत भी कम होती है और यह ज्यादा Secure भी है।

    Cloud Storage फिजिकल स्टोरेज को बहुत तेजी के साथ Replace भी कर रहा है, क्योंकि इसके कई सारे फायदे हैं- जैसे यह Unexpected Disaster(आग वगैरा) से उपलब्ध रखता है, क्योंकि Data Virtual Server पर स्टोर रखता है।

    difference between Cloud Computing and Cloud Storage : Cloud Computing को Cloud Storage की तुलना में Higher Processing Power की आवश्यकता होती है जबकि Cloud Storage को ज्यादा Storage Space की आवश्यकता होती है।

    Cloud Computing ज्यादातर Business को टारगेट करती है जबकि Cloud Storage का Professional और Personal में ज्यादा यूज होता है।

    क्लाउड इंजिनियर कैसे बने :

    क्लाउड इंजिनियर एक आईटी क्षेत्र से जुड़ा होता है जो क्लाउड कम्प्यूटिंग को डिजाइन करने, उसको मेनेज करने, उसको विकसित करने का काम करता है जिससे कम्पनियों को ऑन डिमांड संसाधनों का(जैसे स्टोरेज, सर्वर, डेटाबेस, आदि) का लाभ उठाने में मदद मिलती है।

    स्किल

    क्लाउड इंजिनियर बनने के लिये आपको स्किल आनी चाहिए, डेटाबेस का ज्ञान होना चाहिए,

    प्रोग्रामिंग लेग्वेज को सीखना होता है, अच्छा संचार व टीम वर्क की स्किल आनी चाहिए, गिटहब आना चाहिए।

    क्लाउड कंप्यूटिंग में Salary :

    इसकी सैलरी अलग अलग कॉलेज पर निर्भर करता है जैसे IIT से पास हो तो इसमें पैकेज लगभग 20 लाख तक मिल सकता है, पुराने बन्दों के लिये नये के लिये भी लगभग 10 लाख हो सकता है। यदि आप NIT से पास हो तो लगभग 15 लाख पैकेज मिल सकता है पुराने बन्दे के लिये नये बन्दे के लिये भी लगभग 7 लाख हो सकता है।

    यदि आपको इसमें अनुभव है तो थोड़ा ओर लाभ मिल सकता है, और आपके पास कोर्स कौन सा है, आपके पास स्किल कैसी है यह सब भी मेटर करता है आपकी सेलरी पर।

    साथ ही कम्पनी पर भी निर्भर करता है कि कम्पनी छोटी है बड़ी।  यह भी इस बात पर निर्भर करता है कि आपकी सैलरी क्या रहेगी।

    निष्कर्ष :- आज की तकनीकी दुनिया में Cloud Computing बहुत ही महत्वपूर्ण हो जाती है, क्लाउड कंप्यूटिंग द्वारा बहुत सारी सुविधाएं प्रदान की जाती हैं जिससे हमें टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में बहुत मदद मिलती है, 

    जैसे - data को आसानी से एक्सेस करना, Save रखना, Secure रखना आदि| 

    जिस तरह से Technology का विस्तार हो रहा है, उसी तरह से Cloud Computing का महत्व बढ़ता जा रहा है और आने वाले समय में इसकी डिमांड और बढेगी।

    Cloud Computing के बारे में जानकारी(FAQs) : - 

    Q. क्लाउड कंप्यूटिंग कितने प्रकार के होते है ?

    A. सामान्यतः 4 प्रकार के होते हैं जो कि निम्न हैं :- 

    1. Public Cloud Computing,  
    2. Private Cloud Computing,  
    3. Community Cloud Computing,  
    4. Hybrid Cloud Computing.

    Q. क्लाउड कंप्यूटिंग क्या है संक्षेप में समझाइए?

    A. यदि आपने अपने लैपटॉप पर कोई फाइल Upload की और आप कहीं बाहर जा रहे हैं और आप इस फाइल को अपने मोबाइल से एक्सेस कर पा रहे हैं, तो यह एक क्लाउड कंप्यूटिंग का उदाहरण है। 

    Q. क्लाउड कंप्यूटिंग की शुरुआत कब हुई?

    A. क्लाउड कंप्यूटिंग की शुरुआत 1960 के दशक मैं मानी जाती है, लेकिन जब 1990 के आसपास Sales force कंपनी ने अपनी वेबसाइट के यूजर्स को सेवाएं देना शुरू किया, 

    उसके बाद से इसकी वास्तविक शुरुआत को माना जाता है, क्योंकि इसके बाद लोगों ने क्लाउड कंप्यूटिंग के महत्व को माना और उसे समझना शुरू किया

    Q. क्लाउड कंप्यूटिंग Jobs ?

    A. क्लाउड कंप्यूटिंग में जॉब्स निम्न हैं, क्योकि आप एक ही सेक्टर में जॉब नहीं कर सकते, आपको अलग अलग सेक्टर में जॉब करनी पड़ती है -
    Architect,
    Engineer,
    Security Analyst,
    System Admin,
    Consultant,

    Q. क्लाउड कम्प्यूटिंग में डेटा को बेकअप कैसे किया जाता है

    अनुकों जगहों पर डेटा को इकट्ठा करके।

    Q. क्लाउड कम्प्यूटिंग में कितनी लागत आती है

    यह इस बात पर निर्भर करता है कि आप कितना प्रयोग कर रहे हैं। 

    Q. क्लाउड स्टोरेज क्या होता है

    इंटरनेट पर जो डेटा इकट्ठा किया जाता है और उस पर पहूंचने की सेवा को ही क्लाउड स्टोरेज कहते है।

    Q. क्लाउड कम्प्यूटिंग के क्षेत्र में वर्चुअलाइजेसन क्या होता है

    जब भौतिक मशीन पर कई वर्चुअल मशीन बनाने का काम किया जाता है, तो इस तकनीक को ही वर्चुअलाइजेसन कहा जाता है।

    Q. क्लाउड कम्प्यूटिंग में कंटेनर की क्या भूमिका होती है?

    यह एक मानक इकाई होती है जो अनुप्रयोगों को चलाने का काम करती है। 

    Q. क्लाउड कम्प्यूटिंग में स्कोप

    जिस तरह से तकनीक बढ़ रही है, उसी तरह क्लाउड कम्पयूटिंग की भी मांग बढ़ रही है, और आने वाले समय में इसकी मांग ओर भी ज्यादा बढ़ने की संभावना है तो इसलिये हम कह सकते है इसका स्कोप भविष्य में बढ़ने की संभावना है।

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