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आरबीआई बैंक का इतिहास : भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) क्या है, इसके कार्य, गवर्नर लिस्ट

भारतीय रिज़र्व बैंक(आरबीआई) का इतिहास :-


आसान भाषा में - साल 1926 में एक कमीशन भारत आता है, जिसका नाम था यंग हिल्टन कमीशन, क्योंकि सभी आदेश, निर्णय लंदन से आते थे, फिर उनको भारत के अन्दर लागू किया जाता था, फिर उस वक्त बैंकिंग सुधार की भारत में बात चलने लगी।



RBI Bank | आरबीआई बैंक का इतिहास :  भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) क्या है, इसके कार्य, गवर्नर लिस्ट


यंग हिल्टन कमीशन ने ब्रिटिश इंडिया को यह सिफारिश की, कि भारत में एक ऐसी बैंक(आरबीआई) की स्थापना होनी चाहिए, जो सभी बैंकों के लिये नियम बनाये,


सभी बैंकों की देख-रेख करे व लाइसेंस वगैरा के काम करें। इसके लिये हम इस को कुछ शक्ति व कार्य देंगे जो केन्द्रीय बैंक बन जाये।


फिर साल 1927 में ब्रिटिश संसद में एक बिल पास होता है कि भारत में आरबीआई बना दी जाये, लेकिन यह बिल पास नहीं हो सका और फिर 1933 में फिर से यह बिल ब्रिटिश संसद में पेश किया गया, अबकी बार यह बिल पास हो गया।


फिर साल 1934 में आरबीआई अधिनियम, 1934 लागू होता है, इस अधिनियम में बताया गया कि आरबीआई के पास क्या शक्तियां और कार्य है।


फिर अगले वर्ष 1 अप्रैल, 1935 में आरबीआई की स्थापना कलकत्ता में हो जाती है तथा अक्टूबर 1937 में आरबीआई का मुख्यालय मुंबई में शिफ्ट हो जाता है जो कि वर्तमान में भी आरबीआई का मुख्यालय मुंबई में ही है।


उसी वक्त एक घटना और घटी कि वर्मा भी एक अलग देश बन रहा था तो उस वक्त वर्मा ने कहा कि आरबीआई वर्मा में भी अकाउंट की देख रेख करें और आरबीआई ने 1947 तक वर्मा के अकाउंट की देख रेख की व साल 1947 में भारत और पाकिस्तान भी अलग हो जाते है,


तो पाकिस्तान ने भी विनती की, कि आरबीआई जून, 1948 तक हमारे अकाउंट की भी देख रेख करे, क्योंकि पाकिस्तान के पास कोई केन्द्रीय बैंक नहीं थी, इसलिये भारत ने भी अनुमति दे दी की जब तक पाकिस्तान में केन्द्रीय बैंक की स्थापना नहीं हो जाती तब तक आरबीआई पाकिस्तान को सर्विस देगी,


फिर 1948 में पाकिस्तान का केन्द्रीय बैंक बन जाता है और अब आरबीआई केवल भारत के लिये काम करने लगता है। 


एक बात ध्यान देने वाली है कि जब आरबीआई 1935 में बना उस वक्त भारत का 4.4 प्रतिशत पैसा आरबीआई में लगा था और लगभग 96 प्रतिशत पैसा ब्रिटिश का लगा था। 


फिर 1 जनवरी, 1949 को आरबीआई का राष्ट्रीयकरण हो जाता है और 96 प्रतिशत पैसा भारत ब्रिटिश को वापस कर देता है।



वैसे भारत की बैंकिंग प्रणाली का इतिहास बहुत पुराना है यानी इसकी शुरूआत प्राचीन  काल में हुई है लेकिन यहाँ हम RBI की बात कर रहे हैं कि RBI का इतिहास, RBI क्या है और यह कैसे काम करती है, RBI के उद्देश्य, कार्य क्या है ? आदि | 



भारत में बैंकिंग का इतिहास 19वीं शताब्दी से है, भारत में पहला सफलतापूर्वक बैंक 1806 में बैंक ऑफ बंगाल था वैसे इससे पहले भी बैंक स्थापित हो चुके थे, लेकिन वे बैंक सफल नहीं थे, जैसे- बैंक ऑफ हिन्दुस्तान 1779 में स्थापित हुआ।



भारत का पहला वाणिज्यिक बैंक अवध वाणिज्यिक बैंक था, जिसकी स्थापना 1881 में हुई थी, फिर 1892 में इंपीरियल बैंक, ब्रिटिश सरकार के समय स्थापित हुआ।


स्वतंत्रता के बाद बैंकिंग क्षेत्र में दो कदम उठाये गये -

पहला-भारतीय रिजर्व बैंक का राष्ट्रीकरण और बैंकिंग विनियम अध्नियम जिसने आरबीआई को बैंकिंग को विनियमित करने का अधिकार दिया।


दूसरा- पंजाब नेशनल बैंक 1895 में लाहौर में स्थापित हुई थी।

 

  • स्वतंत्रता से पहले के बैंक-

  • बैंक ऑफ इंडिया 1906 में स्थापित हुआ।

  • बैंक ऑफ बड़ोदरा 1908 में,

  • सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया 1911,

  • बैंक ऑफ मैसूर 1913,

  • इम्पेरियल बैंक ऑफ इंडिया 1921 में,

  • आरबीआई 1934 में,

  • उक्त बैंकों की स्थापना हुई।



फिर 1949 में भारतीय रिजर्व बैंक(RBI) का राष्ट्रीयकरण होता है सबसे पहले आरबीआई का ही राष्ट्रीयकरण हुआ क्योंकि पहले क्या होता था कि जो प्रेसिडेंसियां हुआ करती थी और उनका अलग-अलग ही प्रशासन हुआ करता था, कोई राष्ट्रीय स्तर पर प्रशासन नहीं था यानी पूरे देश का बैंकिंग सिस्टम एकीकृत नहीं था जैसा कि आज है।


बैंकिंग प्रणाली एकीकृत ना होने के कारण, इसका प्रभाव नहीं पड़ता था, और उस वक्त एकीकृत बैंकिंग प्रणाली की जरूरत थी, इसलिये बैंकिंग प्रणाली का एकीकृत करना शुरू किया।



तथा उस वक्त लोगों में बैंकिंग को लेकर विश्वास भी नहीं था इसलिये भारतीय रिजर्व बैंक(आरबीआई) का राष्ट्रीयकरण किया गया। 

राष्ट्रीयकरण


राष्ट्रीयकरण का मतलब है कि बैंक का मुख्यालय दिल्ली में होगा और उसकी कई ब्रांचे अलग-अलग जगहों पर खोली गयी जिससे यह पता लगे कि भारत का यह केन्द्रीय बैंक है।


आजादी के बाद 1949 में भारतीय रिजर्व बैंक की स्थापना जो कि भारत का केन्द्रीय बैंक है, फिर 1969 में 14 बैंकों का राष्ट्रीयकरण किया गया, फिर 1980 में भी राष्ट्रीयकरण किया गया। जिसके बाद बैंकिंग सेक्टर में गतिविधियां बढ़ी।


RBI कैसे काम करता है?


हम बैंक में पैसे जमा इसलिये करते हैं क्योंकि बैंक Secure होती है जिससे हमारा पैसा डूबने से बचता है और साथ ही ब्याज भी मिलता है।


बैंक इस पैसे को Loan पर देती है जो कि जमाकर्ता के ब्याज से ज्यादा ब्याज लेती है, लेकिन जब Loan का पैसा वापस ना आये या जमाकर्ताओं द्वारा बड़ी मात्रा में राशि निकाली जाये तो इससे बैंक के डूबने की संभावना हो सकती है। 


इसलिये इस परिस्थिति से निपटने के लिये RBI द्वारा कुछ Tools जैसे- CRR, SLR, Repo Rate, Reverse Repo Rate आदि के माध्यम का use किया जाता है ताकि बैंकों को दिवालिया होने से बचाया जा सके।


नकद आरक्षित अनुपात (Cash Reserve Ratio)


CRR एक उपाये है कि बैंकों के पास कितना पैसा है और प्रत्येक बैंक को अपने कुल Cash Reserve का एक निश्चित हिस्सा RBI के पास रखना होता है(नकद में)


ऐसा इसलिये किया जाता है कि यदि किसी भी समय बहुत बड़ी तादाद में जमाकर्ताओं को रकम निकालने की आवश्यकता पड़े तो बैंकों को पैसा चुकाने में दिक्कत का सामना ना करना पड़े।वर्तमान में  CRR 4.50% है। इन पैसों पर बैंकों को कोई ब्याज नहीं मिलता है।


SLR - बैंकों को अपने पास कुल जमा का नकद, सोना, प्रतिभूति के रूप में खुद के पास जमा करना होता है ताकि बैंकों को मुसीबत में काम आ सके।


Repo Rate (रेपो रेट)


रेपो रेट वह दर है जिस पर बैंक RBI से ऋण लेते हैं यदि RBI रेपो रेट में कटौती करता है तो बैंकों को यह संदेश जाता है कि उन्हें आम लोगों और कम्पनियों के लिये ऋण दरों को आसान करनाचाहिए। वर्तमान में रेपो रेट 6.50 % है।


RBI द्वारा Repo Rate के बढाने से RBI से बैंकों को ज्यादा ब्याज पर Loan(लोन) मिलेगा जिससे बैंक भी अपने ग्राहकों को ज्यादा ब्याज पर लोन देंगी जिससे लोग कम Loan लेंगे तो बाजार में मांग कम होगी जिसके कारण मंहगाई कम होगी(बाजार में तरलता(Liquidity) के Flow कम होने से वस्तुओं की कीमत कम होगी।)

Reverse Repo Rate (रिवर्स रेपो रेट)

यह रेपो रेट के विपरीत होती है यानी बैंक अपनी कुछ धन राशि को RBI में जमा करते है, जिस पर RBI उन्हें ब्याज देता है। वर्तमान में रिवर्स रेपो रेट 3.35% है।

तरलता समायोजन सुविधा (Liquidity Adjustment Facility- LAF)


LAF में सभी व्यापारिक बैंक सरकारी बैंक, ग्रामीण बैंक, गैर-वित्तीय संस्थाएं  RBI से उधार ले सकती हैं, जबकि MSF केवल अनुसूचित बैंक के संबंध में है।


इसमें बैंकों को पुनखर्रीद समझौतों, रेपो एग्रीमेंट के माध्यम से ऋण प्राप्त करने या रिवर्स रेपो के माध्यम से RBI को ऋण प्रदान करने की अनुमति प्रदान की जाती है। बैंकों को उनकी Liquidity को समायोजित करने में सहायता करती है। इसमें Overnight और Term रेपो नीलामियां दोनों LAF का हिस्सा हैं।


Rbi Bank Rate (बैंक दर)


इसमें सामान्य ब्याज दर पर RBI द्वारा अन्य बैंकों को पैसा उधार दिया जाता है। यह वह दर होती है जिस पर RBI बैंकों को लंबी अवधि के लिये ऋण देता है इसके द्वारा RBI साख नियंत्रण(Credit Control) का काम करता है। वर्तमान में बैंक रेट 6.75% है।


सीमांत स्थायी सुविधा (Marginal Standing Facility-MSF)


MSF के तहत बैंक अन्तर-बैंक तरलता(Inter-Bank Liquidity) की कमी को पूरा करने के लिये आपातकालीन स्थिति में RBI से उधार लेते हैं।(किसी बैंक के पास सरकारी प्रतिभूति  बगैरा नहीं है तो वह अपने NTDL का 1 % उधार ले सकती है। ) वर्तमान में MSF 6.75 % है। इसमें ब्याज दर रेपो रेट से ज्यादा होती है।


बैंक, Inter-Bank उधार के तहत एक निर्दिष्ट(Specified) अवधि के लिये एक-दूसरे को धन उधार देते हैं। 

सरकारी प्रतिभूति (Government Security)


यह एक सरकारी शपथपत्र है जिसके माध्यम से सरकार RBI से पैसे उधार लेती है। 

Standing Deposit Facility-SDF

RBI ने तरलता को जमा करने के लिये एक अतिरिक्त उपकरण के रूप में SDF की शुरूआत की है। जिस पर 3.75 प्रतिशत की ब्याज दर लागू होगी।


RBI ने SDF को वर्ष 2018 में RBI Act, की संशोधित धारा-17 के तहत पेश किया था। 


यह तरलता को Manage करने के लिये एक अतिरिक्त उपकरण है।


भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) :-

आरबीआई भार की एक प्रमुख बैंक है और आरबीआई देश की अर्थव्यवस्था को चलाने व उसको कंट्रोल करने के लिये जिम्मेदार संस्था है, जो कि भारत सरकार के अन्तर्गत एक स्वतंत्र निकाय है जिसकी स्थापना 1  अप्रैल, 1935 को हुई।


आरबीआई की स्थापना के वक्त इसके पास 5 करोड़ पूंजी थी। इसके शुरूआत में सभी शेयर गैर-सरकारी शेयरधारकों के पास थे, यानी सरकार के पास इसके शेयर नहीं थे।


कुछ लोगों के हाथों में शेयर के केन्द्रीकरण को रोकने के लिये 1 जनवरी, 1949 को सरकार ने भारतीय रिजर्व बैंक का राष्ट्रीयकरण कर दिया गया था।


आरबीआई भारत का मुख्य बैंक है, जो भारत सरकार के अन्तर्गत एक स्वतंत्र बैंक है। आरबीआई का मुख्यालय मुबंई में हैं।


RBI  का मुख्य कार्य होता है, मौद्रिक नीति को तैयार करना(मौद्रिक नीति क्या होती है इसे पढ़ने के लिये यहां क्लिक करें), नकदी सप्लाई को कंट्रोल करना होता है, इसके अलावा भी आरबीआई के कुछ महत्वपूर्ण कार्य होते हैं-


  • बैंकों और वित्तीय संस्थाओं के लिये नियम बनाना, पंजीकरण व संचालन का आयोजन करना।

  • मुद्रा बाजार में मैनेज करना।

  • वित्तीय स्थिरता और बैंकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना।

  • भुगतान सिस्टम में सुधार करना।

  • आरबीआई के द्वारा उद्योग, व्यापार व अर्थिक विकास के क्षेत्र में कई नीतियां और कार्यवाही की जाती है साथ ही यह देश की मुद्रा, राजस्व व वित्तीय संरचना के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। 


आरबीआई के गवर्नर

आरबीआई के प्रशासन और दिशा को मैनेज करने के लिये एक केन्द्रीय निदेशक मंडल होता है जिसमें 20 सदस्य होते हैं जिसमें 1 गवर्नर और 4 डिप्टी गवर्नर व सरकारी अधिकारी शामिल होते हैं,


जिन्हें भारत सरकार द्वारा देश के आर्थिक स्तर को संभालने के लिये नियुक्त किया जाता है तथा 4 निदेशकों को केन्द्र सरकार द्वारा स्थानीय बोर्डों का प्रतिनिधित्व करने के लिये नामित किया जाता है। 


स्थानीय बोर्ड मतलब आरबीआई ने देश में अलग-अलग बोर्ड बना रखे है उनका प्रतिनिधित्व करते है ये।


4 स्थानीय बोर्ड भी है जिनका मुख्यालय- मुंबई, चेन्नई, कोलकाता और नई दिल्ली में स्थित हैं स्थानीय बोर्डों के 5 सदस्यों को केन्द्र सरकार 4 साल के लिये नियुक्त करती है। 


ये स्थानीय बोर्ड अपनी सारी जानकारी केन्द्रीय निदेशक मंडल को, जिससे आर्थिक स्थिति में सुधार आ सके और स्थानीय बोर्ड केन्द्रीय निदेशक मंडल द्वारा दिये गये निर्देश व आदेशों के अनुसार कार्य करते हैं।


लेकिन भारतीय रिजर्व बैंक(आरबीआई) का प्रधान कार्यालय मुंबई में है।


आरबीआई के गवर्नर की नियुक्ति -


आरबीआई के गवर्नर की नियुक्ति कैबिनेट सचिव की अध्यक्षता वाली वित्तीय क्षेत्र नियामक नियुक्ति खोज समिति(FSRASC) के द्वारा दिये गये प्रस्ताव पर ही नियुक्ति होती है 


हम कह सकते है कि इसकी नियुक्ति में प्रधानमंत्री की भूमिका बहुत अहम हो जाती है क्योंकि कैबिनेट सचिव, कैबिनेट की सुनेगा और कैबिनेट के अध्यक्ष प्रधानमंत्री होते हैं।


आरबीआई के गवर्नर का कार्यकाल कितना होता है- आरबीआई के अधिनियम की धारा 8(4) के अनुसार गवर्नर और डिप्टी गवर्नर का कार्यकाल 5 साल होता है जो कि केन्द्र सरकार उन्हें नियुक्त करते समय तय करती है। इनकी पुनः नियुक्ति हो सकती है। 


योग्यता


आरबीआई अधिनियम के तहत कोई भी फिक्स योग्यता नहीं है।


निष्कासन


गवर्नर को केन्द्र सरकार द्वारा हटाया जा सकता है। 


आरबीआई के पहले गवर्नर Osborne Smith थे, जो 1935 से 1937 तक रहे,  दूसरे गवर्नर James Taylor थे , जो 1937 से 1943 तक रहे | फिर भारत के पहले आरबीआई के गवर्नर सी.डी.देशमुख थे जो 1943 से 1949 तक रहे।



आरबीआई के सबसे ज्यादा लम्बे समय तक गवर्नर कौन रहे थे- Sir Benegal Rama Rau, जो 1949 से 1957 तक रहे | 


आरबीआई के सबसे कम लम्बे समय तक गवर्नर कौन रहे थे- Amitav Ghosh (केवल 20 दिन) | डॉ मनमोहन सिंह आरबीआई के गवर्नर 1982 से 1985 तक रहे।


23वें आरबीआई के गवर्नर रघुराम राजन है जो 2013 से 2016 तक रहे। 24 वें आरबीआई के गवर्नर डॉ उर्जित पटेल है जो 2016 से 2018 तक रहे। 25वें आरबीआई के गवर्नर शक्तिकांत दास है जो 2018 से अब तक हैं।


भारतीय रिज़र्व बैंक(आरबीआई) के कार्य


आरबीआई भार की एक प्रमुख बैंक है और आरबीआई देश की अर्थव्यवस्था को चलाने व उसको कंट्रोल करने के लिये जिम्मेदार संस्था है, जो कि भारत सरकार के अन्तर्गत एक स्वतंत्र निकाय है इसके मुख्य कार्य निम्न हैं-


करेंसी छापना- 


आरबीआई 2 रूपये से लेकर 2000 रूपये के नोट छापता है व सभी सिक्के भारत सरकार जारी करती है। 2 रूपये से 2000 हजार के नोट आरबीआई द्वारा प्रिंट होते हैं और इस पर हस्ताक्षर आरबीआई के गवर्नर के होते हैं।


1 रूपये के नोट भारत सरकार प्रिंट करती है व हस्ताक्षर वित्त सचिव करता है। सभी सिक्के भारत सरकार द्वारा प्रिंट किये जाते हैं और इन सिक्कों पर कोई हस्ताक्षर नहीं करता है। 


करेंसी सर्कुलेशन


2 रूपये से 2000 रूपये के नोट, 1 रूपये का नोट व सभी सिक्के आरबीआई के पास जाते है, फिर आरबीआई इस पैसे को बैंकों में देता है और बैंक इस पैसे को जनता तक पहूंचाते हैं यानी बाजार में। बैंकों और ग्राहकों को मिलकर बनता है बाजार। 


इसलिये हम कह सकते है कि सभी पैसों को बाजार तक आरबीआई पहूंचाती है इसी प्रक्रिया को करेंसी सर्कुलेशन कहा जाता है। 


आरबीआई बैंकों का बैंक है?


क्योंकि सभी बैंकों को पैसा जमा करना हो या पैसा उधार लेना हो तो ये बैंक आरबीआई के पास जायेंगे इसलिये आरबीआई को बैंकों का बैंक कहा जाता है। 


सरकारी बैंक


आरबीआई को सरकारी बैंक इसलिये कहा जाता है कि भारत सरकार का अकाउंट आरबीआई में है यदि भारत सरकार को लोन लेना या पैसा जमा करवाना है तो सरकार आरबीआई के पास जाती है।


मंहगाई को कंट्रोल करना


आरबीआई कई तरीकों से देश की मंहगाई को संतुलित करने का प्रयास करती है ताकि निवेश, व्यापार और आर्थिक गतिविधियों में संतुलन बना रहे।


मूल्यांकन और निगरानी का कार्य


आरबीआई जो आर्थिक संस्था है उनके मूल्यांकन व निगरानी का कार्य करती है आरबीआई देखती है कि बैंकों व वित्तीय संस्थाओं के कार्य बनाये गये नियम के अनुसार चल रहे हैं या नहीं।


उधार देने वाली अंतिम संस्था

जैसे किसी बैंक को लोन चाहिए और वह अन्य वैंकों के पास जाता है, लेकिन अन्य बैंकों ने लोन देने से मना कर दिया तो अब यह आरबीआई के पास जायेगा यानी आरबीआई की यह जिम्मेदारी होती है कि आरबीआई उन बैंकों की मदद करे जिनके लिये सारे दरवाजे बंद हो जाते हैं।


फॉरेन रिजर्व को मैनेज करना


आरबीआई भारत का फॉरेन रिजर्व को मैनेज करता है कि कितना एसडीआर, कितना गोल्ड, कितनी विदेशी करेंसी रखनी है आदि कार्य आरबीआई द्वारा ही किये जाते हैं।


नीति बनाना


आरबीआई भारतीय अर्थव्यवस्था के लिये आर्थिक नीतियों को बनाता है जैसे- ब्याज दर, रिजर्व नियम, उच्च्तम कर दर आदि।


बैंकों को कंट्रोल करना


आरबीआई बैंकों के कंट्रोल और उनके मूल्यांकन का काम करता है और यह बैंकों को नियम का पालन करने के लिये कहता है साथ ही उनकी सुरक्षा व स्थिरता भी सुनिश्चित करता है। 


वित्तीय समावेशन


जैसे ऐसे अकाउंट जो जीरो बैलेंस या मीनीमम अमाउंट में खोलने का कार्य भी आरबीआई करता है जैसे जन धन योजना में खाते खोले गये। क्योंकि बहुत से ऐसे व्यक्ति थे जो पैसों की कमी के चलते अकाउंट नहीं खोल पाते थे।


प्राथमिक सेक्टर में लोन देना


आरबीआई द्वारा जो विदेशी बैंक व वाणिज्यिक बैंक से कहा गया कि आप 40 प्रतिशत लोन प्राथमिक सेक्टर को देना होगा।


इसके अलावा आरबीआई अन्य कई कार्य करता है जैसे- जो ऑनलाइन लेन-देन, या ऑनलाइन लेन-देन वाले एप्स होते है उनकी निगरानी करना, वित्तीय संस्थाओं के लिये ट्रेनिंग देना आदि।


आरबीआई भारतीय अर्थव्यवस्था के सभी क्षेत्रों में(व्यापार, निवेश व वित्तीय सेवाओं) में विकास को सुनिश्चित करने का कार्य करता है। 


भारतीय रिज़र्व बैंक(आरबीआई) के उद्देश्य :-


आरबीआई का मुख्य उद्देश्य है भारत में मौद्रिक स्थिरता को बनाये रखना व मूल्य स्थिरता बनाये रखना, विकास की गति को बनाये रखने के लिये ऋण का पर्याप्त प्रवाह सुनिश्चित करना व वित्तीय स्थिरता बनाये रखना।


वित्तीय बाजारों से ऋण और मुद्रा के माध्यम से वित्तीय स्थिरता सुनिश्चित करना।


छोटे और मध्यम बैंकों के लिये मौद्रिक नीतियों का प्रबंधन करना।


बैंकों को वित्तीय परिस्थितियों के अनुसार कंट्रोल करना, प्रबंध करना व उनकी संपत्ति की सुरक्षा करना।


मुद्रा बाजारों की निगरानी करना कि बाजार नियमों का पालन कर रहे हैं या नहीं।


वित्तीय बाजारों में निवेशकों की निगरानी करना।


आर्थिक विकास का समर्थन करना, 


आरबीआई भारतीय अर्थव्यवस्था को संतुलित व स्थिर बनाने का प्रयास करता है।


मौद्रिक नीति क्या है?

मौद्रिक नीति  RBI द्वारा तय की जाती है, क्योंकि पैसे के संबंध में इसे स्वायत्ता(Autonomy) दी गयी है।

जनता द्वारा Bank के लेन-देन के लिये RBI की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण हो जाती है, क्योंकि Money Supply को RBI द्वारा Control किया जाता है,


जैसे- RBI अपनी दरों में (Repo Rate, CRR...... आदि) कमी कर देती है तो इससे ब्याज की दर सस्ती हो जाती है तो लोग ब्याज ज्यादा लेंगे एवं इसके उलट कर देने पर ब्याज की दर मंहगी हो जाती है।


यह आर्थिक नीति की Demand है जो देश के केन्द्रीय बैंक(जैसे-भारत के संदर्भ में RBI) द्वारा Money Supply को Control करने, सतत आर्थिक विकास(Sustainable Development Growth) को बढ़ावा देने आदि को संदर्भित(Referenced) करता है।


मौद्रिक नीति 2 प्रकार की होती है?


1. सस्ती मौद्रिक नीति - 


जब अर्थव्यवस्था में तरलता(Liquidity) बढ़ान के लिये यानी लोगों के पास पैसा पहूंचाने के लिये RBI अपने ब्याज दरों में कमी कर देती है जिससे ब्याज सस्ता हो जाता है तो लोग लोन ज्यादा लेते है और इसी कारण बाजार में तरलता बढ़ती है।


2. मंहगी मौद्रिक नीति - 


जब अर्थव्यवस्था में तरलता कम करने के लिये यानी लोगों के पास से पैसे खींचने के लिये RBI अपने ब्याज दरों में बढ़ोत्तरी कर देती है जिससे ब्याज मंहगा हो जाता है तो लोग लोन कम लेते हैं और इसी कारण बाजार में तरलता कम होती है।


मौद्रिक नीति समिति


मौद्रिक नीति समिति की स्थापना केंद्र सरकार द्वारा 45ZB के तहत किया गया था, यह RBI Act, 1934 के अन्तर्गत एक संविधिक निकाय(Statutory Body) है,


इसके द्वारा आर्थिक विकास के लक्ष्यों को ध्यान से रखते हुए मुद्रा स्थिरता(Currency Stability को बनाये रखने आदि कार्य किये जाते हैं। मौद्रिक नीति समिति भारत सरकार द्वारा गठित एक समिति है इसका गठन जून, 2016 को ब्याज दर निर्धारण को अधिक उपयोगी व पारदर्शी बनाने के लिये किया गया।


RBI का गवर्नर मौद्रिक नीति समिति का पदेन अध्यक्ष होता है। RBI का डिप्टी गवर्नर समिति का प्रभारी होता है।

हमें बैंकों की जरूरत क्यों पड़ी


बैंक ने फिर इस पैसे को बी नाम के व्यक्ति को दे दिये, बी व्यक्ति भी यही किया, बैंक ने फिर इस पैसे को सी नाम के व्यक्ति को दे दिया। यदि ए व्यक्ति इस पैसे को बैंक में जमा नहीं करता तो यह पैसा उसके पास ही पड़ा रहता।


इसलिये बैंक इस पैसे को घूमाता रहता है जिससे बैंक अर्थव्यस्था की साइकिल का पूरा करती है। इसलिये बैंक बहुत महत्वपूर्ण हो जाता है।


उत्पादन लागत- हमें किसी भी चीज को बनाने के लिये जिन चीजों की आवश्यकता पड़ती है उसे उत्पादन लागत कहते हैं जैसे- आप एक कंपनी खोलना चाहते हो 


तो आपको इसके लिये भूमि, श्रम, पूंजी, उद्यम(यानी आपको इसके लिये जमीन होनी चाहिए, इसमें काम करने वाले आदमी और पैसे की जरूरत पड़ेगी व इसको चलाने का तरीका पता होना चाहिए।) की जरूरत पड़ती है।


आय लागत- किसी भी आदमी को पैसा कमाने के लिये 4 चीजें(भूमि, श्रम, पूंजी, उद्यम) बहुत महत्वपूर्ण हो जाती है यदि आपके पास पैसा है तो आप किराये के द्वारा पैसा कमा सकते हो, 


यदि आप कहीं श्रम करते हो तो इससे मजदूरी मिलती है, यदि आपके पास पैसा है, तो आप इससे ब्याज वगैरा ले सकते हो, यदि आपके पास उद्यम है तो आप अपना दिमाग के द्वारा पैसा कमा सकते हो।


जब बैंक नहीं थे तो हमारे पास जो पैसा आता था उसको अपने पास रखते थे, फिर बाद में हमने मध्यस्थता के लिये एक व्यक्ति को बैठाया जिसे हम जमीदार कहते हैं, जो हमारे लिये बैंक का काम करता था, 


लेकिन जैसे ब्रिटिश राज आता गया, तो बैंकिंग सिस्टम आता गया जैसे मान लेते हैं कि मेरे पास किराये से पैसा आया और मैंने इस पैसे को बैंक में जमा कर दिया,


बैंक ने इस पैसे को ए नाम के व्यक्ति को लोन पर दे दिया, फिर ए व्यक्ति ने  जमीन खरीदी और किराये से जो पैसे कमाये उसे बैंक में जमा कर दिये| 


List of RBI Governors - आरबीआई गवर्नर लिस्ट                 


  • Osborne Smith                 

  • Jamesh Braid Taylor 

  • C.D. Deshmukh

  • Sir Benegal Rama Rau

  • K.G. Ambegaonkar

  • H.V.R. lyengar

  • P.C. Bhattacharya

  • L.K. Jha

  • B.N. Adarkar

  • S. Jagannathan

  • N.C. Sen Gupta 

  • K.R. Puri

  • M. Narasimham

  • I.G.Patel

  • Manmohan Singh

  • A. Ghosh

  • R.N. Malhotra

  • S. Venkitaramanan

  • C.Ragarajan

  • Bimal Jalan

  • Y.V. Reddy

  • D.Subbarao

  • Raghuram Rajan(sep, 2013 to sep, 2016)

  • Urjit Patel( Sept, 2016 to Dec, 2018)

  • Shaktikanta Das(Des, 2018 to till date)


आरबीआई की रिपोर्ट


भारत में बैंकिंग की प्रवृत्ति और प्रगति पर रिपोर्ट :- जो कि एक वार्षिक रिपोर्ट है जो हर साल प्रकाशित होती है।

मुद्रा और वित्त पर रिपोर्ट- यह भी वार्षिक रिपोर्ट है।


वित्तीय स्थिरता रिपोर्ट- यह अर्द्व वार्षिक रिपोर्ट है।


विदेशी मुद्रा प्रारक्षित रिपोर्ट- यह अर्द्व वार्षिक रिपोर्ट है। 


मौद्रिक नीति रिपोर्ट- यह हर दो महिने में प्रकाशित होती है।


बैंक ऋण वितरण सर्वेक्षण- यह तिमाही रिपोर्ट है। 

आरबीआई का प्रतीक चिन्ह क्या है?


आरबीआई के प्रतीक चिन्ह में पाम के पेड़ को शामिल किया गया है, इसका उपयोग करेंसी नोटों, चेक और प्रकाशनों पर बैंक के प्रतीक के रूप में किया जाता है।


यह ईस्ट इंडिया कंपनी की शेर और पाम की मोहर से प्रेरित है।

भारत में बैंकिंग का विकास :-

बैंकिंग सिस्टम एक महत्वपूर्ण औद्योगिक क्षेत्र है जो कि आर्थिक विकास को बढ़ाने में मदद करता है। भारतीय बैंकिंग सिस्टम की शुरूआत अत्यंत प्राचीन काल से मानी जाती है, लेकिन यहां हम बैंकिंग सिस्टम के विकास के महत्वपूर्ण पहलुओं पर चर्चा कर रहे है-



प्राचीन काल- भारतीय बैंकिंग प्रणाली प्राचीन काल से चली आ रही है जैसे वेदों में व्यापार की महत्वपूर्ण चर्चाए होती थी और उनमें ऋण के संबंध में जिक्र किया गया है।


मध्य काल- मध्य काल में मुगलों के काल में बैंकिंग प्रथाएं तेजी के साथ विकसित हुई और लोगों द्वारा खुद की बैंको और व्यापारिक संघ की स्थापना की, जिसमें जमा, उधार की सेवाएं प्रदान की जाती थी।


ब्रिटिश काल - इस काल में बैंकिंग सेक्टर में बहुत ज्यादा बदलाव आया जैसै- 1840 में बैंक ऑफ बंगाल स्थापना, उसके बाद 1840 में ही बैंक ऑफ बम्बें, 1843 में बैंक ऑफ मद्रास की स्थापना की गयी। 


शुरूआत में 3 प्रेसीडेंसी(बंगाल, मूबंई, मद्रास) में अलग-अलग बैंकों की स्थापना की गयी थी, 1921 में इन तीनों बैंकों को विलय करके इंपीरियल बैंक ऑफ इंडिया की स्थापना की गयी, फिर 1955 में इंपीरियल बैंक ऑफ इंडिया का नाम बदलकर स्टेट बैंक ऑफ इंडिया(एसबीआई) कर दिया गया।


स्वतंत्रता काल- आजादी के बाद 1949 में भारतीय रिजर्व बैंक की स्थापना जो कि भारत का केन्द्रीय बैंक है, फिर 1969 में 14 बैंकों का राष्ट्रीयकरण किया गया, फिर 1980 में भी राष्ट्रीयकरण किया गया। जिसके बाद बैंकिंग सेक्टर में गतिविधियां बढ़ी।


वर्तमान में- आज की बैंकिंग प्रणाली नयी तकनीक व डिजिटल रूप का प्रयोग करके बैंकें अपने ग्राहकों को सुविधाएं दे रही है जैसे- इंटरनेट बैंकिंग, मोबाइल बैंकिंग, डिजिटल पेमेंट आदि।


भारतीय बैंकिंग सिस्टम ने भारतीय अर्थव्यस्था में महत्वपूर्ण भूमिका अदा की है, व इसने भारत ही नहीं अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर पहूंच बढ़ाई है। बैंकिंग सिस्टम का विकास द्वारा ना केवल आर्थिक विकास हुआ है बल्कि इसने सामाजिक और आर्थिक दोनों रूप से समाज को सुविधाएं प्रदान की हैं।


भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के बारे में जानकारी(FAQs) :-

Q. भारतीय रिजर्व बैंक का राष्ट्रीयकरण कब हुआ :

A. जब आरबीआई 1935 में बना उस वक्त भारत का 4.4 प्रतिशत पैसा आरबीआई में लगा था और लगभग 96 प्रतिशत पैसा ब्रिटिश का लगा था। 


फिर 1 जनवरी, 1949 को आरबीआई का राष्ट्रीयकरण हो जाता है और 96 प्रतिशत पैसा भारत ब्रिटिश को वापस कर देता है।


Q. भारतीय रिजर्व बैंक के पांच कार्य लिखिए |

A. भारतीय रिज़र्व बैंक के निम्न 5 कार्य हैं -

1- महंगाई को कण्ट्रोल करना,

2 - करेंसी छापना

3 - करेंसी सर्कुलेशन,

4 - नीति बनाना,

5 - फॉरेन रिज़र्व को मैनेज करना

Q. भारतीय रिजर्व बैंक कहाँ है |

A. भारतीय रिजर्व बैंक(आरबीआई) का प्रधान कार्यालय मुंबई में है।

Q. भारतीय रिजर्व बैंक(RBI) का मुख्यालय कहाँ स्थित है |

A. भारतीय रिजर्व बैंक(आरबीआई) का मुख्यालय मुंबई में स्थित है

 भारतीय रिजर्व बैंक क्या है

 प्रत्येक देश में बैंकिंग की प्रणाली और देश की अर्थव्यवस्था को नियंत्रित करने का कार्य एक बैंक करता है, जिससे सेंट्रल बैंक कहते हैं। इसी प्रकार से भारत का भी अपना एक सेंट्रल बैंक है। जिससे कि आरबीआई (रिजर्व बैंक आफ इंडिया) कहते हैं।


RBI भारत के सभी अन्य छोटे - बड़े बैंकों के लिएकार्य करती है। और RBI की गाइडलाइंस का पालन करते हुए बैंकों को संचालित करती है। देश की अर्थव्यवस्था को नियंत्रित करने का कार्य भी आरबीआई का ही होता है। भारत की सारी मुद्रा का हिसाब किताब आरबीआई के द्वारा रखा जाता है।

 RBI का मुख्यालय मुंबई में स्थित है,  मुख्यालय में ही RBI के गवर्नर बैठेते हैं। और वर्तमान समय में पूरे देश मे RBI के 31 क्षेत्रीय कार्यालय मौजूद हैं, RBI के वर्तमान गवर्नर शक्तिकांत दास जी हैं।

RBI के संपर्क सूत्र नंबर

 यदि कोई बैंक आपके साथ धोखा-धड़ी करता है तो आप आरबीआई के साथ जारी किए गए हेल्पलाइन नंबर पर कॉल करके आरबीआई को अपनी समस्याएं बता सकते हैं। RBI के सभी संपर्क नंबर निम्नलिखित है -

  • 8691960000 (जानकारी और सहायता हेतु)

  • 011-23711 333 ( नई दिल्ली- हेड ऑफिस)

  • 022-22711 4715( मुंबई-रीजनल ऑफिस)

  • 01352742001 ( बैंकिंग लोकपाल)

 भारतीय रिजर्व बैंक का बढ़ता महत्व

 भारतीय रिजर्व बैंक भारत का केंद्रीय बैंक है। आरबीआई मौद्रिक नीति लागू करने और मुद्रा जारी करने का कार्य करता है। भारत ने दुनिया में सबसे अच्छी सफल घरेलू उत्पाद वृद्धि दर दर्ज की है। इसे चार सबसे शक्तिशाली उभरते बाजार देश में से एक के रूप में भी जाना जाता है। जो BRIC देशो का हिस्सा है, जिसमे ब्राजील,रूस,भारत और चीन शामिल है। यह बैंक जिसका मुख्यालय भारत की वित्तीय राजधानी मुंबई में है। इसकी संपत्ति 5.93 बिलियन डॉलर थी।

आरबीआई और भारत की अर्थव्यवस्था

भारत की केंद्र सरकार और वित्त मंत्रालय के बाद इसका आरबीआई भारत की अर्थव्यवस्था को चलाने में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। आरबीआई अपनी सेवाएं भारत के अन्य वाणिज्यिक बैंक तक फैलाता  है।


और इस प्रकार के यह बैंक नेटी जेंट्स को बैंकिंग सेवाएं प्रदान करते हैं। आरबीआई भारत में रहने वाले लोगों को एक सुरक्षित बैंकिंग प्रदान करता है। आरबीआई बाजार में उचित नगदी प्रवाह सुरक्षित करने के लिए रेपो दर को कम रखने की कोशिश करता है


,ताकि लोग विकास कार्यों में अधिक पैसा लगा सके। आरबीआई भारत की केंद्र सरकार के साथ मिलकर विदेशी व्यापार में आसानी प्रदान करता है। ताकि यह अधिक FDI ( प्रत्यक्ष विदेशी निवेश)आकर्षित कर सके।


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