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अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष(IMF) क्या है : IMF के कार्य, उद्देश्य, आलोचना व शर्तें

IMF ने भारत को किया अलर्ट, क्योंकि भारत पर कर्ज का बोझ बढ़ा है और यह आंकड़ा जीडीपी के 10 प्रतिशत के पार पहूंच सकता है, जिससे भारत को लम्बे समय में कर्ज चुकाने की हो सकती है दिक्कत। भारत पर 205 लाख करोड़ तक का कर्ज हो चुका है।

IMF का इतिहास : 

जब द्वितीय विश्व युद्ध समाप्त हुआ तो अमेरिका सहित पूरे विश्व को लगा कि अब हमें विश्व का पुनर्निर्माण करना चाहिए व आर्थिक विकास को लाना चाहिए,  

क्योंकि युद्ध के कारण विश्व की आर्थिक स्थिति को बहुत बड़ा नुकसान हुआ था, इसी को ध्यान में रखते हुए 1944 में 44 देशों के प्रतिनिधि ब्रेटनवुड सम्मेलन में शामिल हुए और इसमें IMF, विश्व बैंक, ITO (यानी अब WTO है) पर बातचीत हुई।

विश्व बैंक द्वारा गरीब देशों को जो ऋण दिया जाता है, उस का आगे निरंतर विकास करने, वित्तीय संतुलन बनाने, वित्तीय स्थिति को सुधारने के लिए एक संस्था बनाई गई जिसका नाम IMF (अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष) है।

द्वितीय विश्व युद्ध के बाद विश्व के पुनर्निर्माण, विकास में IMF व विश्व बैंक की अहम भूमिका रही है।

IMF क्या है :- IMF 190 देशों का एक वैश्विक संगठन है, जो वैश्विक मुद्रिक सहयोग को बढ़ावा देने, वित्तीय स्थिरता को सुरक्षित करने, अंतरराष्ट्रीय व्यापार की सुविधा, उच्च रोजगार और सतत आर्थिक विकास को बढ़ावा देने और दुनिया भर में गरीबी को कम करने के लिए काम कर रहा है।

आईएमएफ का प्राथमिक उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय मौद्रिक प्रणाली की स्थिरता सुनिश्चित करना है जैसे- अचानक कीमतों का बढ़ना - घटना,  रुपए डॉलर का एक्सचेंज अचानक बढ़ना - घटना आदि।

विनिमय दरों और अंतरराष्ट्रीय भुगतान की प्रणाली, जो देशों और उनके नागरिकों को एक - दूसरे के साथ लेन देन करने में सक्षम बनाती है।

फंड के अधिदेश को 2012 में वैश्विक स्थिरता पर आधारित सभी व्यापक आर्थिक और वित्तीय मुद्दों को शामिल करने के लिए अद्यतन किया गया था, 

यानी 2012 से IMF उन सभी मुद्दों पर मदद करेगा जो स्थिरता वित्तीय स्थिरता के लिए जरूरी होते हैं।

कुछ समय पहले तक IMF का Managing Director(MD) कोई यूरोपीय ही हो सकता था, लेकिन अब इस अनिवार्यता को समाप्त कर दिया गया तथा वर्तमान में 190 देश इसके सदस्य हैं

विश्व बैंक क्या है, यह कैसे पैसे उधार देता है Click 


अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष(IMF) क्या है  : IMF के कार्य, उद्देश्य, आलोचना व शर्तें क्या है  : भारत और IMF :  International Monetary Fund in hindi

IMF की स्थापना कब हुई:- IMF की स्थापना 1945 में हुई, 

IMF मुख्यालय कहाँ है :- IMF मुख्यालय वाशिंगटन में है।

IMF का उद्देश्य :- IMF का प्रमुख उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय मौद्रिक सहयोग को प्रोत्साहित करते हुए, विनिमय दरों की स्थिरता को सुनिश्चित करना है, ताकि अंतर्राष्ट्रीय व्यापार का संतुलन, विकास संभव हो सके|  

यह प्रतिस्पर्धात्मक अवमूल्यन पर अंकुश लगाते हुए बहुपक्षीय भुगतानओ की व्यवस्था को स्थापित करता है और विद्वान विनियम प्रतिबंधों को कम करता है।

रुपए - डॉलर का विनिमय स्थिर करना, यदि कोई इसे जानबूझकर, कीमते ऊपर नीचे करता है उसे रोकना।

यदि किसी देश को ऋण की आवश्यकता है तो आईएमएफ गारंटर बनकर ऋण उपलब्ध करा  सकता है।

IMF भुगतान संतुलन की चुनौतियों से निपटने के लिए सदस्य देशों को अस्थाई तौर पर आर्थिक सहायता भी उपलब्ध कराता है | 

अंतरराष्ट्रीय तरलता संकट से निपटने और विनिमय दरों को स्थिरता प्रदान करना, इसकी सर्वोच्च प्राथमिकता है|  

दुनिया भर में गरीबी को कम करना, 

आर्थिक सहायता और सतत आर्थिक विकास के माध्यम से उच्च रोजगार को बढ़ावा देना।

आईएमएफ की सदस्यता कैसे मिलती है :

वर्तमान में इसके 190 सदस्य हैं भारत इसका संस्थापक सदस्य रहा है, इसकी सदस्यता प्राप्त करने की 2 शर्ते हैं :- 

1. विश्व बैंक की सदस्यता, 

2. IMF में अनिवार्य अंशदान करना चाहिए(कोटा सिस्टम)।

IMF में कोई देश कितना धन देता है ? :- इस अंशदन का निर्धारण विश्व व्यापार में भागीदारी, प्रति व्यक्ति राष्ट्रीय आय और आर्थिक समद्धि दर के आधार पर किया जाता है, 

यानी किस देश की कितनी हिस्सेदारी रहेगी इसका निर्धारण तीन बातों (1.विश्व व्यापार में हिस्सेदारी 2. प्रति व्यक्ति राष्ट्रीय आय, 3. आर्थिक समद्धि दर)  के आधार पर तय किया जाता है|

फिर प्रत्येक देश को अपने लिए निर्धारित कोटे के अनुसार IMF में एक निश्चित राशि जमा करनी पड़ती है, इस कोटे की समय-समय पर समीक्षा की जाती है| 

हर देश अपने कोटे का 25% को स्वयं द्वारा चयनित किसी देश की मुद्रा में अंशदान करता है, जबकि बचा हुआ 75% राशि अपने देश की मुद्रा के रूप में जमा करनी होती है। 

IMF के कार्य :-  

  • अंतर्राष्ट्रीय विनिमय दरों में स्थिरता बनाए रखना इसका मुख्य कार्य है| 
  • प्रतिस्पर्धी अवमूल्यन और अतिमूल्यन को रोकना यानी कोई भी देश अपने मूल्य को तेजी से ना गिरा पाए, ताकि वित्तीय संतुलन बना रहे|  उद्देश्य 
  • वाह्य व आकस्मिक वित्तीय संकटों से सदस्य देशों को आगाह करना और इससे निपटने के लिए सुझाव देना जैसे - यदि IMF को लगता है कि भारत किसी गहरे संकट में फंस सकता है तो आईएमएफ भारत को सुझाव देगा कि इस तरह की स्थितियां खराब हो सकती है।
  • अंतरराष्ट्रीय वित्तीय प्रवाह में उत्पन्न बाधा को दूर करना, जैसे कोई लेन-देन में कोई दिक्कत आ रही है तो उसको रोकना|  
  • Balance of Payment के संकट के समय ऋण देना (भारत ने 1991 में सोने को गिरवी रखकर ऋण लिया था, क्योंकि उस वक्त भारत के पास लगभग 1 सप्ताह तक ही सामान खरीदने की क्षमता थी)|  
  • गरीब देशों को संकट से निपटने के लिए ऋण + शर्तों के आधार पर सदस्य देशों को ऋण देता है।
  • तकनीकी सहायता/सलाह देना, 
  • अर्थव्यवस्था में मौद्रिक स्थिरता के लिए भी सलाह देता है।

IMF लोन कैसे देता है ?:-

आईएमएफ की शर्तें क्या है : -

1. स्थिरता :- निम्न में स्थिरता लाना;- 

राजकोषीय घाटे को न्यूनतम करना : जैसे - कोई देश अपनी योजनाओं पर ज्यादा खर्च करता है तो इससे राजकोषीय घाटा बढ़ता है, इसे न्यूनतम करना|  

राजस्व घाटा समाप्त करना, 

टैक्स वृद्धि + व्यय कम करना( टैक्स बढ़ाना और अपने खर्चे कम करना), 

विनिमय दर + ब्याज दर को बाजार पर छोड़ना (जैसे -विनिमय दर - रुपए का डॉलर से बदलाव, डॉलर का रुपए से बदलाव यह बाजार पर छोड़ना),

मुद्रास्फीति कंट्रोल करना, 

Balance of Payment को स्थिर करना।

2. ढांचागत परिवर्तन :- 

लोकतंत्र व्यवस्था लाना, 

LPG(Liberalization, Privatization, Globalization) लागू करना, जैसे - भारत ने 1991 में जब IMF से ऋण लिया था, उस वक्त भारत ने LPG  को अपनाया था | 

Liberalization(उदारीकरण) :-  विदेशी कंपनियों के लिए अपने देश में दरवाजे खोलने, कानूनी व्यवस्था को कम करना पड़ेगा, इस्पेक्टर राज को खत्म करना पड़ेगा, यानी कठोर कानून में लाइसेंस व्यवस्था को न्यूनतम करना पड़ेगा और उदारीकरण को अपनाना पड़ेगा।

Privatization(निजीकरण) :  हर जगह सरकार काम नहीं करेगी, हर जगह सरकार का हस्तक्षेप नहीं होगा बल्कि निजी करण की भूमिका अहम होनी चाहिए।

Globalization(भूमंडलीकरण) :  अपने देश के बाजारों को वैश्विक बाजार के साथ जोड़ना।

IMF की संरचना क्या  है :-

Board of Governor - 190 सदस्य देशों के केंद्रीय बैंक का गवर्नर IMF का गवर्नर होता है

Board of Governor-  इसमें  प्रत्येक सदस्य देश के लिए एक गवर्नर व एक वैकल्पिक गवर्नर होते हैं; इसके कार्य - 

यह कार्यकारी परिषद के लिए कार्यकारी निदेशकओ के चयन या नियुक्ति के लिए उत्तरदाई है,

कोटा में वृद्धि -  SDR के आवंटन के लिए अनुमोदन करना, 

नए सदस्यों के प्रवेश व सदस्यों की वापसी,

सामान्यता IMF व विश्व बैंक समूह के Board of Governor की 1 साल में एक बार बैठक होती है, 

बैठक के दौरान उनके संबंधित संस्थानों के कार्य पर चर्चा की जाती है |

मंत्री स्तरीय समितियों द्वारा बोर्ड ऑफ गवर्नर को सलाह दी जाती है| 

मंत्री स्तरीय समिति, अंतरराष्ट्रीय मौद्रिक वित्तीय समिति(IMFC) और विकास समिति, बोर्ड ऑफ गवर्नर को सलाह देती हैं।

कार्यकारी परिषद :-  इसमें 24 सदस्य होते हैं, इन 24 सदस्यों में से 3 सदस्य अमेरिका, चीन, जापान के हैं और 21 सदस्य बाकी देशों के ग्रुप बनाकर (जैसे - भारत और इसके साथ कुछ और देश से एक सदस्य होगा) से आते हैं| 

फिर टॉप पर होता है MD(मैनेजिंग डायरेक्टर) जिससे MD की शक्ति बहुत बढ़ जाती है ।

MD - Executive Council - Board of governor.

अंतरराष्ट्रीय मौद्रिक व वित्तीय समिति(IMFC) :-  इसमें 24 सदस्य होते हैं, जिन्हें 190 गवर्नर से चुना जाता है, यह सभी सदस्य देशों का प्रतिनिधित्व करते हैं |

यह IMFC के प्रबंधन और साथ ही वैश्विक अर्थव्यवस्था को प्रभावित करने वाले अन्य सामान्य मुद्दों पर भी चर्चा करती है।

विकास समिति :- यह IMF के बोर्ड ऑफ गवर्नर व विश्व बैंक के 25 सदस्यों वाली एक संयुक्त समिति है, 

इस समिति का कार्य विकासशील देशों, उभरते बाजार, आर्थिक विकास से संबंधित मुद्दों पर IMF और विश्व बैंक के बोर्ड ऑफ गवर्नर को सलाह देना है।

IMF और विश्व बैंक में अंतर :- 

IMF भुगतान संतुलन के लिए, वित्तीय स्थिरता के लिए कार्य करने वाली संस्था है,

IMF बहुत ही कम पैसे वाले देशों की मदद करती है, जबकि विश्व बैंक सब को ऋण देने में मदद करती है।

वैसे IMF और विश्व बैंक दोनों अलग-अलग संस्थाएं हैं, लेकिन दोनों की संरचना लगभग एक जैसी है, 

कार्यप्रणाली भी लगभग एक जैसी है और दोनों संस्थाओं का निर्माण ब्रेटनवुड्स सम्मेलन के तहत हुआ है, इसलिए दोनों में सुधार की बात चल रही है।

IMF के कार्यक्रम :- 

PRGF(poverty reduction growth facility ) :- यह योजना 1999 को शुरू की गई है, जिसमें निम्न आय वाले देशों को गरीबी की समस्या से निपटने हेतु वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जाती है, 

जिसक ब्याज दर 0.5% होती है और इसे वापस करने की सीमा 5 से 10 वर्ष के मध्य होती है लेकिन इस कार्यक्रम के साथ IMF की शर्त होती है- सुशासन, लोकतंत्र, आर्थिक सुधार लागू करना आदि।

2008-09 में जो वित्तीय संकट उत्पन्न हुआ था उससे निपटने के लिए IMF ने नई लोचशील साख सुविधा( Flexible Credit Line -FCL ) के तहत मूलभूत संरचना की मजबूती वाले देशों को बिना शर्त सहायता उपलब्ध करवाई।

जब ग्रीस में संकट आया तो IMF ने मदद की, लेकिन अमेरिका का रवैया अलग था जिससे यूरोपीय देशों को लगा कि अब इसमें सुधार होना चाहिए नहीं तो IMF अपना वर्चस्व भी हो सकता है, 

क्योंकि इस संकट से निपटने के लिए अमेरिका ने कई प्रकार की समस्याएं उत्पन्न की |

इसके सुधार के लिए 85% मत पक्ष में होने चाहिए, जोकि बिना अमेरिका के संभव नहीं, क्योंकि अमेरिका के पास 16 -17  प्रतिशत मत है।

IMF में कमियां :- 

इसका मताधिकार एक मत एक राष्ट्र पर आधारित नहीं है यानी है अलोकतांत्रिक व्यवस्था है, जबकि यह संस्था ऋण देते वक्त लोकतंत्र की मांग करती है।

जिस देश का ज्यादा अनुदान होगा उतना ही अधिक उसको कोटा मिलता है और कम अंशदान वाले देशों को कम कोटा मिलता है यानी जिस देश का जितना अनुदान उसके मत की वैल्यू भी उतनी होगी।

यहां कोटे की व्यवस्था के आधार पर मत एवं ऋण की व्यवस्था की जाती है | 

कोटे का निर्धारण अर्थव्यवस्था का आकार, प्रति व्यक्ति आय, वैश्विक व्यापार में हिस्सेदारी के आधार पर होता है।

वर्तमान में यह कोटा SDR(Special Drawing Rights)  के रूप में लिखा जाता है| 

SDR(Special Drawing Rights) क्या है  :- द्वितीय विश्व युद्व(1945) की समाप्ति के बाद अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, सोवियत संघ जैसी ताकतें थीं, जिसमें अमेरिका आर्थिक रूप से काफी मजबूज था और अमेरिका विश्व में महाशक्ति बनना चाहता था जिसका सबसे अच्छा तरीका था गरीब देशों को ऋण बांटना जो तरीका आज चीन अपना रहा है।

इसलिये ब्रिटेनबुड्स सम्मेलन में विश्व बैंक(World Bank) और IMF(International Monetary Fund) की स्थापना हुई जिसमें अमेरिका का योगदान बहुत महत्वपूर्ण हो जाता है।

  • IMF ने 1969 में अपने सदस्य देशों के लिये SDR को International Reserve सम्पत्ति के रूप में बनाया गया था, लेकिन जैसे ही ब्रेटनवुड्स System का पतन होता है तो SDR को मुद्राओं की एक बास्केट के रूप में Fix किया गया।

  • इस बास्केट में 5 देशों की Currency(अमेरिका का डॉलर, जापान की मुद्रा येन, चीन का यूआन और ब्रिटेन का Pound) को शामिल किया गया।

आईएमएफ की करेंसी 1971 से पहले डॉलर हुआ करती थी लेकिन 1971 में आईएमएफ की मुद्रा SDR है SDR 5 मुद्राओं(अमेरिका का डॉलर, जापान की मुद्रा येन, चीन का यूआन, यूरोप का यूरो और ब्रिटेन का Pound,  ) से मिलकर बनता है।

किस देश की कितनी हिस्सेदारी है : IMF के पास कितना रिज़र्व है ?

  • अमेरिका -  17.43                  
  • जापान  -   6.47                     
  • चीन  -    6.40                         
  • फ्रांस  -    4.23 
  • ब्रिटेन  -  4.23 
  • इटली  -   3.16 
  • भारत  -   2. 75 

वर्ष 2010 के बाद विकासशील देशों का योगदान बढ़ाया गया और एसडीआर के कोटे को बढ़ाया गया भारत IMF के कोटे में आठवें स्थान पर आता है।

Quote का निर्धारण कैसे होता है :- वर्तमान में अंशदान का निर्धारण -

  • जीडीपी के औसत भरांश -    50%, 
  • खुलापन       -                   30%, 
  • आर्थिक विविधता     -        15%, 
  • अंतरराष्ट्रीय रिजर्व        -    5% 

के संदर्भ में होता है।

अंशदान कोटा प्रत्येक 1 लाख  SDR के अंशदान के लिए एक अतिरिक्त मत प्रदान किया जाता है, क्योंकि IMF में विकसित देशों का अंशदान अधिक है इसलिए मताधिकार में भी उनका वर्चस्व बना हुआ है।

रिजर्व ट्रेंस(Reserve Tranche) क्या है :-  रिजर्व ट्रेंस वह मुद्रा होती है जिसे प्रत्येक सदस्य देश द्वारा अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष को प्रदान किया जाता है यानी IMF का हर देश अपना कुछ पैसा रिजर्व ट्रेंस में रखने के लिए देता है और यह पैसा उस देश पर वित्तीय संकट के समय ही निकाला जाता है, 

मतलब वह देश जिसका यह पैसा है वह आपातकाल की स्थिति में ही इस पैसे का प्रयोग कर सकता है।

अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष(IMF) क्या है  : IMF के कार्य, उद्देश्य, आलोचना व शर्तें क्या है  : भारत और IMF :  International Monetary Fund in hindi


आलोचना :- 

  • IMF मैं भारित मत का सिद्धांत होता है व MD और निदेशक मंडल पर बड़े देशों का कंट्रोल होता है, 
  • इससे दक्षिण के  देश जो विकासशील, अल्पविकसित को लगता है कि आईएमएफ विकसित देश के हितों को प्राप्त करने का जरिया बन गया है यानी विकासशील और अल्प विकसित देशों को लगता है कि यह IMF केवल विकसित देशों का प्रतिनिधित्व करता है।
  • विकासशील देशों की मांग है कि यह एक वैश्विक संस्था है जिसमें लोकतांत्रिक प्रवृत्ति, पारदर्शी एवं समावेशी व्यवस्था होनी चाहिए | 
  • मंदी के समय एक  तरफ विकसित देशों की आर्थिक क्षमता कम हुई है तो दूसरी तरफ विकासशील अर्थव्यवस्था में उभरती अर्थव्यवस्था जैसे BRIC, साउथ अफ्रीका आदि का महत्व बढ़ा है, 
  • इसलिए IMF + विश्व बैंक जैसी संस्थाओं में इनकी भूमिका बढ़ाने की मांग बढ़ रही है|  
  • इन संस्थाओं में सुधार की आवश्यकता है विश्व बैंक में IMF की तरह शर्तें लागू नहीं होती।
  • IMF जो वित्तीय सहायता देशों को प्रदान करता है, इसके साथ कठोर शर्ते भी लगाता है, यह शर्तें बाजार अर्थव्यवस्था के अनुरूप होती है, जिससे राज्य की भूमिका संकुचित हो जाती है, 
  • जैसे - IMF  के अनुसार हर क्षेत्र में निजीकरण होना चाहिए जबकि जो क्षेत्र लाभ प्रदान नहीं करते वहां पर निजी व्यक्ति या संस्था निवेश नहीं करेंगे, 
  • जिसका परिणाम यह होगा जो व्यक्ति इससे जुड़े होंगे उनका विकास नहीं हो पाएगा इसलिए ऐसे में सरकारी हस्तक्षेप जरूरी हो जाता है।
  • सब कुछ बाजार अर्थव्यवस्था पर छोड़ने पर राज्य के कल्याणकारी राज्य जैसे - गरीबी, बेरोजगारी, खाद्य सुरक्षा, शिक्षा, स्वास्थ्य जैसी नीतियों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है;
  • जैसे - IMF कहता है कि राजकोषीय घाटे को कम करना जबकि भारत जैसे देश अपने कल्याणकारी नीतियों पर खर्च करते हैं, जिससे राजकोषीय घाटा बढ़ता है | 
  • यदि भारत कल्याणकारी नीतियों पर खर्च कम कर दे, तो इसका असर कल्याणकारी नीतियों पर नकारात्मक पड़ेगा| 
  • IMF का मुख्य कार्य अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थाओं को मजबूत करना है, वैश्विक संकट के बारे में सदस्य देशों को आगाह करना, लेकिन IMF सब प्राइम संकट यूरो संकट आदि को समझने में असफल रहा।
  • 2008 में आईएमएफ स्वयं आर्थिक संकट से जूझ रहा था तब इसने अपना सोना बेचकर तथा विकासशील देशों को के कोटे को बढ़ाकर संकट को दूर किया।

भारत और IMF :-

भारत द्वारा 1991 में IMF से जो ऋण लिया गया था वह भारत ने IMF के सभी ऋण को चुका दिया है और भारत IMF के प्रोग्रामों में पैसा दे रहा है।

पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह जी द्वारा G 20 सम्मेलन में IMF की संरचना और कार्यक्षेत्र में व्यापक सुधार की बात कही थी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी जी-20 में इस बात को दोहराया।

IMF में दो प्रमुख सुधारों की मांग की जा रही है- 

1. कोटा सिस्टम को समाप्त किया जाए - विकासशील देश चाहते हैं कि कोटा सिस्टम को बढ़ाया जाए या आईएमएफ का लोकतंत्रिककरण कर दिया जाए, क्योंकि वर्तमान में USA, जापान, चीन, जर्मनी, यूके, फ्रांस इनके पास लगभग 40% से ज्यादा कोटा है, 

जबकि ब्रिक्स के विकासशील सदस्यों द्वारा विश्व की जीडीपी का 35% प्रतिनिधित्व किया जाता है, लेकिन इनका आईएस आईएमएफ में कोटा 12% के आसपास ही है।

2. संरचना में परिवर्तन :- इसके कार्यकारिणी परिषद में सुधार जैसे पहले आईएमएफ की कार्यकारिणी परिषद में 24 सदस्यों में से 5 सदस्य स्थाई और 19 सदस्य अस्थाई हुआ करते थे लेकिन अब स्थाई और अस्थाई को खत्म कर कुल 24 सदस्य का निर्वाचन होता है,

वैसे तो अब किसी भी देश का सदस्य MD बन सकता है लेकिन व्यवहारिक रूप से किसी भी देश के व्यक्ति को MD नहीं बना सकते, क्योंकि अमेरिका के समर्थन के बिना MD नहीं बन सकता इसलिए इसमें सुधार की आवश्यकता है।

IMF के बारे में जानकारी(FAQs) :-

IMF की स्थापना 1944 में हुई, इसमें कुल 190 देश शामिल है, 150 देशों के नागरिक इसके स्टाफ है और इसके 24 डायरेक्टर होते हैं यह अधिकतम 1 ट्रिलियन डॉलर उधार दे सकता है|  

IMF द्वारा 36 तरीकों से उधार दिए जा सकते हैं बहुत ही गरीब देशों को 0% ब्याज पर यह पैसा देता है।

Q. IMF में कुल कितने देश सदस्य है ?

A. IMF में कुल देश सदस्य 190 है| 

Q. भारत ने कितनी बार आईएमएफ से कर्ज लिया?

A. भारत ने 1993 के बाद से IMF से कोई कर्ज नहीं लिया, लेकिन 1991 में भारत ने IMF से कर्ज  लिया था | 

Q. क्या भारत IMF का सदस्य है?

A. भारत IMF का संस्थापक सदस्य है |  

Q. आईएमएफ का अध्यक्ष कौन है 2023 ?

A.  IMF का MD और अध्यक्ष बल्गेरियाई अर्थशास्त्री क्रिस्टालिना जॉर्जीवा है |  

Q. IMF full form?

A.  IMF - International Monetary Fund |  

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